राजस्थान में विदेशी महावत

लक्ष्मी के साथ फेबियो
Image caption फेबियो स्विटज़रलैंड के है लेकिन अब भारत में ही महावत बने रहना चाहते हैं.

राजस्थान में आमेर के ऐतिहासिक किले ने हाथियों के कई सवार और सहचर देखे होंगे लेकिन सदियों पुरानी इस विरासत में स्विट्ज़रलैंड के फेबियो एक नया और अनूठा अध्याय जोड़ते हैं.

वो पिछले कई माह से आमेर में महावत बनने का प्रशिक्षण ले रहे हैं. इस काम में वो हथिनी लक्ष्मी की भरपूर सेवा करते हैं और अब तो फेबियो पर्यटकों को लक्ष्मी की पीठ पर बैठा कर आमेर किले की सैर करवाने भी ले जाते हैं.

महावत बिरादरी के शफीक़ ख़ान कहते हैं, ''लक्ष्मी और फेबियो में अब बड़ी घनिष्ठता है. फेबियो की आवाज सुनकर लक्ष्मी ऐसे चली आती है जैसे भाई के बुलावे पर बहन चली आती है.''

सैलानी के बतौर कभी भारत और फिर जयपुर आए फेबियो को आमेर पर उसके ही जैसे पर्यटकों को हाथी के पीठ पर घूमते देख हाथियों से अनुराग हो गया.

वो वापस लौटे और महावत बनने का प्रशिक्षण लेने लगे. अब वो हाथियों को ऐसे हांकते है जैसे बहुत ही सिद्धहस्त महावत हों.

वो महावत परिवारों के साथ रहते है और महावत शफीक़ के हाथियों की सेवा करते है. शफीक़ के पास 12 हाथी हैं. उनमें लक्ष्मी फेबियो के साथ जुडी है. लक्ष्मी फेबियो के इशारे पर चलती है.

फेबियो अपने महावत के किरदार में बहुत ही खुश हैं. वो कहते हैं, ''मेरे लिए ये एक हसीन सपने के साकार होने जैसा है. मुझे हाथी बहुत पसंद है. मेरी तमन्ना है कि जीवन भर न तो हाथियों का साथ छूटे और न ही इन महावत परिवारों का.''

हाथी में ऐसा क्या है जो फेबियो खिंचे चले आए. फेबियो कहते हैं, ‘‘क्या बात करते हो. हाथी इन्सान की तरह ही वफादार है. उसमे बुद्धि है, उसमे लगाव है. वो अपने पराए का फर्क़ समझता है.’’

फेबियो के घर वाले भी उनके इस काम से खुश है. वो बताते हैं, ''मेरे घर वाले जानते है कि मैं सही काम कर रहा हूँ. पूरा परिवार मेरे साथ है. अगर वीसा मिलता रहा तो बस यूं ही गजराज की सेवा करने की हसरत है.’’

शफीक़ फेबियो को महावत होने के गुर सिखाते है.

वो कहते हैं, ‘‘फेबियो थोड़ी थोड़ी हिंदी सीख गया है. उन्होंने महावतों की जीवन शैली भी अपना ली है. ये हमारी ही तरह ही अब महावत है. वो खुद सैलानियों को लक्ष्मी की पीठ पर बैठा कर आमेर किले पर ले जाता है. उसके दिन का आगाज़ लक्ष्मी के साथ होता है और दिन ढले लक्ष्मी की परवरिश करते करते फेबियो अपने बिस्तर पर निढाल हो जाता है.’’

इतिहास में कई पन्ने इंसान और जानवर के रिश्तों की कहानी सुनाते मिलते है.अ ब कोई इन रिश्तों पर लिखेगा तो उसमे फेबियो और लक्ष्मी का भी एक पन्ना ज़रूर होगा.

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