गज़ा जाएगा एशियाई कारवां

Image caption गज़ा जाएगा एशियन पीपल्स सोलिडैरिटी फॉर पैलस्टीन का कारवां

गज़ा पट्टी पर इस्राइली कब्ज़े के विरोध में 17 एशियाई देशों के स्वयंसेवी कार्यकर्ता एकजुट हुए हैं.

इन लोगों का कारवां भारत से चल कर, पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, सीरिया और लेबनॉन होते हुए गज़ा पट्टी जाएगा.

'एशियन पीपल्स सोलिडैरिटी फॉर पैलस्टीन' द्वारा आयोजित इस कारवां का मकसद ना सिर्फ राहत सामग्री ले जाना होगा, बल्कि एशियाई देशों की जनता में इसराइल-फ़लस्तीन मुद्दे के बारे में जागरूकता फैलाना भी होगा.

गज़ा पट्टी तक जाने वाले इस कारवां के लिए कई सामाजिक आंदोलनों, ट्रेड यूनियनों और स्वायत्त संस्थाओं से जुड़े लोग, साथ आए हैं.

दिल्ली से रवानगी

ये कारवां 2 दिसंबर को नई दिल्ली से रवाना होगा.

इनका कहना है कि अपने कारवां के ज़रिए वो अपने देश की सरकारों, आम नागरिकों के साथ-साथ इस्राय़ल और फिलिस्तीन तक अपनी आवाज़ पहुंचाना चाहते हैं और दुनिया को बताना चाहते हैं कि वे गज़ा पट्टी पर इस्राइल के कब्ज़े के खिलाफ हैं.

इस आयोजन की समन्वय समिति के फिरोज़ मिठीबोरवाला का कहना है कि, "ये एक पेचीदा मुद्दा है, हम इस पर चर्चा बढ़ाकर, राजनितिक पार्टियों को इससे जोड़कर, इसे एक जन आंदोलन की शक्ल देना चाहते हैं."

इसराइल की निंदा

इससे पहले इसी साल 31 मई को ग़ज़ा की नाकेबंदी तोड़ने और फ़लस्तीनियों तक राहत सामग्री पहुँचाने के मक़सद से जा रहे तुर्की के समुद्री जहाज़ों के बेड़े पर, इसराइली नौसेना ने हमला किया था और कम से कम नौ कार्यकर्ताओं को मार दिया था.

इस घटना के बाद दुनिया भर में इसराइल की काफ़ी निंदा हुई थी.

हालांकि भारत समेत कई देशों की सरकारें इसराइल के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं.

Image caption अमरीका की मध्यस्थता में इसराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया शुरू हुई.

गज़ा कारवां का समर्थन कर रही 'मुस्लिम पोलिटिकल काउंसिल' के डॉ. टी.ए.रहमानी के मुताबिक ये आयोजन भारत सरकार के रवैये का विरोध करता है.

रहमानी कहते हैं कि, "इसराइल के साथ संबंध बनाने से उस देश का नहीं बल्कि इसराइल का फायदा होता है और भारत के साथ हथियारों का व्यापार भी उसी के हक में है."

शांति की कोशिश

पिछले तीन साल से इसराइल ने गज़ा पर आर्थिक पाबंदी लगा रखे हैं.

जिसके चलते गज़ा की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और बेरोज़गारी और भुखमरी बढ़ी है.

हाल में अमरीका की मध्यस्थता में इसराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया शुरू हुई.

लेकिन गज़ा पट्टी पर नए निर्माण बनाने पर लगी रोक की समयसीमा खत्म हो गई है.

फ़लस्तीन के इसे बढ़ाने की दरख्वास्त के बावजूद इसराइल ने ऐसा नहीं किया, जिसकी वजह से शांति की ये कोशिश भी ठंडी पड़ गई है.

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