‘प्रधान पति’ के ख़िलाफ़ महिला प्रधान

महिला प्रधान
Image caption महिला प्रधानों के अधिकारों का इस्तेमाल अक्सर उनके पति करते हैं

दुबली-पतली काया, माथे पर बिंदी, हाथों में चूडि़याँ और सीधा-सरल चेहरा- एक नजर में ममता गांव की किसी भी अन्य महिला की तरह दिखती हैं. लेकिन 24 साल की ममता अपने गांव की प्रधान हैं.

देहरादून जिले के सिंधोर गांव की प्रधान इस युवती ने फ़र्ज को निजी जीवन पर तरजीह देकर साहस और आत्मविश्वास की एक नई मिसाल कायम की है.

72वें और 73वें संविधान संशोधन के बाद महिलाओं के लिए पंचायतों में चुनकर आना आसान ज़रूर हो गया लेकिन अधिकांश जगहों में प्रधानी की डोर उनके पतियों के हाथ में केंद्रित रही.

72वें और 73वें संशोधन में पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गईं हैं.

प्रधान पति

ज्यादातर मामलों में निर्वाचित महिलाएं घर-परिवार में ही सिमटी रहतीं जबकि पति पंचायतों का सारा काम-काज देखते, पत्नियों के नाम पर सारे फैसले करते और उनके अधिकारों का दुरूपयोग करते हैं.

ऐसे मामले इतने आम थे कि इस ट्रेंड के लिए एक नया शब्द ‘प्रधान पति’ ही गढ़ लिया गया. ममता का केस भी इससे कुछ अलग नहीं था.

दो साल पहले वो गांव की प्रधान चुनी गईं, मगर पंचायत पर कब्जा उनके पति का रहा.

लेकिन जब ममता को पता चला कि उनके पति उनके नाम पर ‘हेराफेरी कर रहे हैं’ तो उन्होंने खामोश बैठना मुनासिब नहीं समझा.

उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की है और जिलाधिकारी को भी पत्र लिखकर अपने पति की कारगुजारियों से अवगत कराया है.

बीबीसी से बातचीत में ममता ने कहा,''मेरे पति मेरे फर्जी दस्तखत करके पैसों की हेरफेरी कर रहे हैं. उन्होंने विकास के लिए आए पैसों को भी खाने-पीने में उड़ाया. इसलिये मैंने घर से बाहर आने का फ़ैसला किया. अब मैं ख़ुद ही पंचायत की बैठक में जाती हूं और ख़ुद ही सारे फ़ैसले लेती हूँ.''

उनका कहना था, ''गांववाले तो इस फैसले से खुश नज़र आते हैं, मेरे पति ज़रूर नाराज़ हैं लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं है.''

फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

महिला प्रधान को जेल

गौरतलब है कि रूड़की ज़िले में हुई लगभग ऐसी ही एक घटना में ‘प्रधान पति’ के गलत काम की वजह से उनकी पत्नी को जेल हो गई थी जो खुद निर्वाचित प्रधान थीं.

महिला प्रधान फ़िलहाल जमानत पर रिहा हैं.

पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रधानों के प्रशिक्षण के लिये काम करनेवाली संस्था रूलक के अध्यक्ष अवधेश कौशल का कहना है, "ममता ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो अब तक देश में कहीं और देखने को नहीं मिला है. इससे दूसरी निर्वाचित प्रतिनिधियों की भी प्रेरणा मिलेगी."

ममता के साहस को देखते हुए योजना आयोग की केंद्र में सचिव सुधा पिल्लई ने उनको पुरस्कार दिलाने की बात कही है.

संबंधित समाचार