कर्नाटक की राजनीतिक जंग दिल्ली पहुँची

येदुरप्पा
Image caption येदुरप्पा की जीत को कांग्रेस ने लोकतंत्र और संविधान की हत्या करार दिया.

कर्नाटक में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और बाग़ी विधायकों की जंग तेज़ हो गई है. कर्नाटक में भाजपा अपने 105 विधायकों को राष्ट्रपति के सामने पेश करने जा रही है.

उच्च न्यायलय में बाग़ी विधायकों की याचिका पर सुनवाई शुरु हो गई है. भाजपा की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी मामले की पैरवी कर रहे हैं.

इस बीच कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने येदुरप्पा सरकार से कहा है कि वो 14 अक्टूबर को सदन में दोबारा बहुमत साबित करने को कहा है.

इसके जवाब में मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा है, ''मैं इस विषय पर अपनी पार्टी और आलाक़मान के साथ बातचीत करुंगा और इस बारे में जो भी फ़ैसला होगा उस पर अमल करूंगा.''

कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के सोमवार को विवादास्पद तरीक़े से विधानसभा में हंगामें के बीच विश्वास मत हासिल करने की राजनीतिक हलकों में आलोचना हुई है.

मंगलवार शाम को ही दिल्ली में इस मसले पर विचार विमर्श करने के लिए केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक होगी.

दिल्ली में भाजपा और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के लिए निकलने से पहले येदुरप्पा ने कहा, ''आडवाणी जी और नितिन गडकरी के नेतृत्व में सभी भाजपा प्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे. हम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को स्थिति से अवगत कराएंगे. लोकतंत्र में स्पीकर का फ़ैसला ही सर्वोपरि होता है. हमारी मांग है कि राज्यपाल को तत्काल उनके पद से हटाया जाए.''

भाजपा के 11 और पाँच निर्दलीय विधायकों ने विश्वास मत के लिए अयोग्य क़रार दिए जाने के विधानसभा स्पीकर के फ़ैसले के ख़िलाफ़ कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. इस मामले में दूसरे दिन की सुनवाई मंगलवार को होनी है.

राष्ट्रपति शासन

कर्नाटक के राज्यपाल ने सोमवार को केंद्र सरकार को मामले पर अपनी रिपोर्ट भेजी, जिसमें राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की गई है.

इस पर बातचीत के लिए सोमवार को प्रधानमंत्री के निवास पर कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक हुई. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, गृह मंत्री पी चिदंबरम ने हिस्सा लिया.

बैठक में कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया जा सका, केवल इतना तय हुआ कि इस मुद्दे पर कोई ठोस फ़ैसला करने के लिए मंगलावार शाम को केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक की जाएगी.

उधर 16 बाग़ी विधायकों ने ख़ुद को मतदान के अयोग्य क़रार दिए जाने के विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपैया के फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है.

सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने 16 विधायकों को मतदान के अयोग्य क़रार दिए था जिसके बाद भारी हंगामे और भ्रम के माहौल के बीच भाजपा ने ध्वनि मत से विश्वास हासिल कर लिया था.

ध्वनि मत से प्रस्ताव जीतने की घोषणा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी थी.

'आरोप-प्रत्यारोप'

कर्नाटक में विपक्षी कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए राजभवन जाकर 29 माह पुरानी येदियुरप्पा सरकार को बर्ख़ास्त करने की मांग की है.

जेडी (एस) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "हम सरकार की तुरंत बर्ख़ास्तगी की माँग करते हैं. विश्वास प्रस्ताव पर सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. ध्वनि मत की घोषणा करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सदन से फ़ौरन बाहर चले गए."

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 'कर्नाटक में लोकतंत्र और संविधान की हत्या हुई है.'

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "कर्नाटक में जो कुछ हुआ, वह न केवल लोकतंत्र की पूर्ण रूप से हत्या है, बल्कि देश में संविधान की हत्या भी है. एक अल्पमत सरकार विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई के ज़रिए बहुमत में बदल दी गई."

लेकिन भाजपा सरकार के विश्वास मत जीतने पर संतोष ज़ाहिर करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और कहा, "कांग्रेस और जेडी (एस) ने भाजपा सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की है."

भाजपा के ही वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडू ने कांग्रेस और जेडी (एस) पर 'गंदी चालें' चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल था जिस कारण उन्होंने विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया.

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