राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश की

येदुरप्पा
Image caption विधान सभा में हंगामे के बीच स्पीकर ने मत विभाजन के बजाय ध्वनिमत से विश्वासमत पारित कराया.

कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफ़ारिश की है. उधर, स्पीकर ने जिन विधायकों को सोमवार सुबह विधानसभा से बर्ख़ास्त कर दिया था उन्होंने इस फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

मामला सोमवार को अदालत में पेश हुआ और अब आगे मंगलवार को सुनवाई करने का फ़ैसला किया है.

इससे पहले सोमवार सुबह कर्नाटक की भाजपा सरकार ने विधानसभा में भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से अपना बहुमत साबित कर दिया है.

सोमवार सुबह कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केजी बोपैय्या ने 16 विधायकों को बर्ख़ास्त कर दिया था. इनमें से 11 विधायक भाजपा के हैं और पांच निर्दलीय हैं जो पिछले दो साल से भाजपा सरकार में शामिल थे और पांच साल तक सरकार को समर्थन देने का हलफ़नामा दे चुके थे.

कांग्रेस ने विधायकों के बर्ख़ास्त किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि विधानसभा विधायक के पास निर्दलीय विधायकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है.

भाजपा के बाग़ी विधायक बर्ख़ास्त

बंगलौर के स्थानीय पत्रकार भास्कर हेगड़े ने बताया कि बाग़ी विधायकों के जबरन विधानसभा में घुसने और पुलिसबल के उन्हें रोकने के हंगामे के बीच स्पीकर ने मत विभाजन के बजाय ध्वनिमत से विश्वासमत पारित कराया.

विरोध

इस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के कई विधायक स्पीकर के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराते रहे.

उन्होंने बताया कि विपक्षी दल के विधायकों सहित कई बाग़ी विधायक राज्यपाल से मिले और स्पीकर के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज किया.

इस मामले में जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी का कहना है कि वो सदन में अपनी संख्या के बारे में भी राज्यपाल को जानकारी देंगे.

इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, '' जिस तरह सदन की कार्रवाई चलाई गई है वो हर तरह से लोकतंत्र और संविधान की हत्या है. स्पीकर ने जो किया वो भी नैतिकता के विरुद्ध है. विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त के आरोप बेबुनियाद हैं और उनकी बिनाह पर सदन में इस तरह की कार्यवाही नहीं की जा सकती.''

मतभेद

बाग़ी विधायकों को बर्ख़ास्त करने के इस फ़ैसले को लेकर स्पीकर और राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के बीच मतभेद भी ऊभर कर सामने आ गए हैं.

कर्नाटक: राज्यपाल और स्पीकर में तनातनी

भास्कर हेगड़े का कहना है, ''राज्यपाल के पास अब भी एक ब्रह्मास्त्र है. येदुरप्पा सरकार के विश्वासमत हासिल करने के बाद भी राज्पाल सरकार को बर्ख़ास्त कर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की पैरवी कर सकते हैं.''

'न्याय की जीत'

विश्वासमत हासिल करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में धन शक्ति और लोकतंत्र का ग़लत इस्तेमाल कर विधायकों को ख़रीदा गया. विश्वासमत के बाद कर्नाटक में आखिरकार लोकतंत्र की जीत हुई है.

उन्होंने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मौके पर संविधान का दुरुपयोग करते हुए लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाएगी.''

विधानसभा से निकलकर मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने भी अपनी जीत पर खुशी ज़ाहिर करते हुए संवाददाताओं से बात की. उन्होंने कहा, '' विपक्षी दल के नेताओं ने विधानसभा के अंदर काफ़ी हंगामा किया, उनका व्यवहार बेहद ख़राब और गरिमा के विरुद्ध था.''

घमासान

इससे पहले कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने बोपैय्या को पत्र लिखकर कहा था कि विश्वास मत से पहले वे किसी भी विधायक को अयोग्य घोषित न करें.

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यपाल के इस निर्देश पर कड़ी आपत्ति जताई.

लोक सभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने राज्यपाल के क़दम को अंसवैधानिक क़रार देते हुए राष्ट्रपति से उन्हें वापस बुलाने की माँग की है.

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. बाग़ी विधायकों की बर्ख़ास्तगी के बाद ये घटकर 208 हो गई थी. इसमें भाजपा के 117, कांग्रेस के 73, जद-एस के 28 और छह निर्दलीय विधायक हैं.

सरकार बनाने के लिए भाजपा को 113 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत थी.

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