छत्तीसगढ़ में सेना,वायु सेना के ठिकाने

वायुसेना अड्डे के लिए चयनित ज़मीन
Image caption इस भूमि पर बनेगा वायुसेना का अड्डा

छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान में वायु सेना की मदद का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

राज्य सरकार नें औधोगिक नगरी भिलाई के पास वायु सेना के प्रस्तावित बेस के लिए ज़मीन के सर्वेक्षण का काम लगभग पूरा कर लिया है.

वायु सेना के अड्डे के अलावा छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर के पास थल सेना के सब-ज़ोनल मुख्यालय के स्थापना का भी प्रस्ताव है.

हालांकि अभी भारतीय प्रशासन ने यह फ़ैसला नहीं लिया है कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ वायु सेना या थल सेना का इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं.

भारतीय वायु सेना के एम-17 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल अर्द्धसैनिक बलों को लाने ले जाने और घायल जवानों को चिकित्सा मुहैया करवाने के लिए किया जा रहा है. मगर कई बार ऐसा हुआ जब आपातकालीन स्थिति में यह हेलीकाप्टर देर से पहुँच पाए.

आपातकालीन हालात

अधिकारी बताते हैं कि इसकी वजह यह है कि हेलीकाप्टर नागपुर स्थित वायु सेना के बेस कैंप से नियंत्रित किये जाते हैं.

राज्य सरकार का मानना है अगर छत्तीसगढ़ में वायु सेना का बेस कैंप बन जाता है तो आपातकालीन स्थिति में अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों को घटना स्थल पर मदद फ़ौरन मुहैय्या कराई जा सकती है.

गोपनीयता का हवाला देते हुए सरकारी अधिकारी इस पर कुछ भी कहने से इनकार करते हैं.

मगर दुर्ग जिले के कलेक्टर ठाकुर राम सिंह नें बीबीसी से बात करते हुए कहा, "हमने बेस कैंप के लिए भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया है मगर अधिग्रहण का काम अभी शुरू नहीं हुआ है."

भिलाई दुर्ग ज़िले का हिस्सा है.

बिलासपुर में भी थल सेना के सब जोनल मुख्यालय के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण पूरा हो गया है.

थलसेना का अड्डा

Image caption नंदिनी के कई गांव ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं.

जहाँ पर सब ज़ोनल मुख्यालय प्रस्तावित है वहाँ की ज्यादातर ज़मीन सरकारी है मगर भिलाई के नन्दिनी इलाके में जहाँ वायु सेना के बेस कैंप के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण हुआ है उसकी मल्कियत मिली जुली है यानि इसका कुछ हिस्सा सरकारी के कब्जे़ में है और कुछ ग्रामीणों के पास.

नन्दिनी के कई गाँव इस कैंप का विरोध कर रहे हैं.

नन्दिनी के बेस कैंप के लिए भारतीय वायु सेना के अधिकारियों नें छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री रमन सिंह, राज्यपाल शेखर दत्त और वरिष्ट पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से कई दौर की बातचीत की है. राज्य सरकार नें वायु सेना को आश्वस्त किया है कि ज़मीन के अधिग्रहण का मामला जल्द ही निपटा लिया जाएगा.

नन्दिनी के जो गाँव इस प्रस्तावित बेस से प्रभावित होने वाले हैं उनका नाम है अहिरी, बीरेभाट, बाग़डूमर, खेदेमारा, धौड़ और बासिन. यहाँ के ग्रामीणों का आरोप है कि बेस कैंप के लिए सर्वेक्षण का काम तो पूरा हो गया है मगर अभी तक सरकार नें उन लोगों से कोई बातचीत नहीं की है.

खेतिहर ज़मीन ना छीनी जाए

अहिरी की सरपंच अनीता कहतीं हैं:" सरकारी कर्मचारी आते रहे. सर्वेक्षण करते रहे. हमें पता चलता रहा कि हमारी ज़मीन बेस कैंप के लिए अधिग्रहित की जायेगी मगर हमसे किसी नें बात नहीं की. यहाँ सब किसान हैं और ज़्यादातर ज़मीन खेतिहर है. हम बेस कैंप का विरोध नहीं कर रहे मगर हम नहीं चाहते कि खेतिहर ज़मीन का अधिग्रहण हो."

इस बाबत पूछे जाने पर छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कँवर का कहना है :"यह बेस कैंप सिर्फ़ माओवादियों के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान के लिए नहीं बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए एक अहम स्तम्भ के रूप में काम करेगा."

कँवर नें स्पष्ट किया कि वायु सेना का इस्तेमाल हमला करने के लिए नहीं किया जाएगा.

हाल ही में अहिरी और इसके आस पास के ग्रामीणों नें ज़मीन अधिग्रहण के विरोध में सड़क जामकर विरोध भी जताया था. मगर सरकारी अधिकारियों को आशा है कि नन्दिनी के ग्रामीणों के साथ जल्द ही समझौता हो जाएगा.