'पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ एकजुट'

सभी पार्टियों के नेता एक साथ
Image caption पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए सभी पार्टी के नेता पटना में एक मंच पर जमा हुए.

बिहार में चुनावी गहमागहमी के बीच एक नई पहल सामने आई, जब कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक मंच पर आकर ' पेड न्यूज़ ' के ख़िलाफ़ संयुक्त रूप से विरोध ज़ाहिर किया.

पटना में बुधवार को इस विषय पर जिन राजनीतिक दलों ने पत्रकार सम्मेलन बुलाया उनमें कांग्रेस, भाजपा, जनता दल-युनाईटेड, राजद, लोजपा, बहुजन समाज पार्टी और भाकपा-माले जैसी प्रमुख पार्टियां शामिल थीं.

बिहार के चुनावी मैदान में इन दिनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ शब्द-युद्ध में लाल-पीले हो रहे राजनेताओं का पटना मे एक मंच पर आकर 'पेड न्यूज़' के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना एक चौंकाने वाली ख़बर थी.

मोटी रक़म ले-दे कर मीडिया के ज़रिये झूठ-सच कुछ भी मनोनुकूल प्रकाशित या प्रसारित करवा लेने वाले अनैतिक और अवैध धंधे का नाम है - 'पेड न्यूज़ '. ख़ासकर चुनाव के समय ज़ोर पकड़ने वाले इस धंधे में शामिल मीडिया प्रबंधन के ख़िलाफ़ यहाँ पहली बार नेताओं का ऐसा एकजुट विरोध सामने आया.

( इस मौक़े पर उठी आवाजों का यहाँ ऑडियो सुने)

'एंटी पेड न्यूज़ फ़ोरम'

चुनाव आयोग ने भी 'पेड न्यूज़' को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के ख़िलाफ़ मानते हुए इस पर कड़ी नज़र रखने के लिए इस बार बिहार में विशेष व्यवस्था की है.

इस सिलसिले में आयकर विभाग से जुड़े अधिकारियों की एक टीम तैनात की गयी है जो चुनाव ख़र्च के साथ - साथ ' पेड न्यूज़' पर भी नज़र रखेगी.

इस बाबत पटना के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने एक मंच का गठन किया है जिसे 'एंटी पेड न्यूज़ फोरम' नाम दिया गया है.

लेकिन हैरत की बात है कि बुधवार को जब राजनीतिक दलों ने ' पेड न्यूज़' के ख़िलाफ़ बोलने के लिए पत्रकार सम्मलेन बुलाया तो उसमे किसी बड़े अखब़ार या राष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल के स्थानीय पत्रकार शरीक नहीं हुए.

इसलिए नेताओं ने आरोप लगाया कि मीडिया प्रबंधकों का खौफ़ इतना ज़्यादा बढ़ गया है कि 'पेड न्यूज़' के विरोध में रहते हुए भी आम पत्रकार खुलकर सामने नहीं आ रहे.

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