वर्षों बाद झारखंड में पंचायत चुनाव

झारखंड (फ़ाइल फ़ोटो)

लगभग 32 वर्षों के बाद आख़िरकार झारखंड में पंचायत चुनाव की घोषणा कर दी गई है.

राज्य निर्वाचन आयोग नें गुरुवार को इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी है.

इस इलाक़े में पिछली बार पंचायत के चुनाव अविभाजित बिहार में वर्ष 1979 में संपन्न हुए थे. ये चुनाव 27 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में कराए जाएंगे.

दूसरे चरण का मतदान 12 दिसंबर को होगा जबकि तीसरे चरण का मतदान 13 दिसंबर को और चौथे चरण का मतदान 20 दिसंबर को होगा. अधिसूचना के बाद अब 24 जिलों के 259 प्रखंडों के 1,43,61,623 मतदाता 53207 पदों के लिए उम्मीदवार चुनेंगे.

इन पदों में 43916 वार्ड समिति के पद, 4423 मुखिया, 4423 ग्राम पंचायत समिति और 445 जिला समिति के पद शामिल हैं.

आरक्षण

इन चुनावों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं हैं. चूंकि झारखण्ड संविधान की पांचवी अनुसूची का राज्य है, राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसडी शर्मा का कहना है कि पंचायत के चुनाव 'पंचायत राज एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया एक्ट' यानि 'पेसा'के प्रावधानों के तहत कराए जाएंगे.

इन प्रावधानों के अनुसार पंचों के पदों में से प्रमुख के पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए जाने हैं. इस मुद्दे को लेकर झारखंड में काफ़ी विरोध भी हुआ था और मामला उच्चतम न्यायालय पहुँच गया था. उच्चतम न्यायालय नें 'पेसा' के तहत ही चुनाव करने का निर्देश दिया है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि राज्य सरकार नें ऐसे 52 वार्डों को अनुसूची से हटा दिया है जहाँ एक भी अनुसूचित जनजाति के सदस्य नहीं रहते हैं. झारखंड के 24 में से 24 जिले नक्सल प्रभावित हैं इसलिए हिंसा मुक्त पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार ने पंचायत के चुनाव सुचारू ढंग से संपन्न कराने के लिए अर्द्ध सैनिक बलों की लगभग 100 कंपनियाँ केंद्र से मांगीं हैं.

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