अयोग्य विधायकों पर न्यायाधीशों में मतभेद

कर्नाटक

कर्नाटक विधान सभा में चार दिनों के भीतर दो बार विश्वास मत डाला गया है

कर्नाटक विधान सभा के 11 ‘अयोग्य’ भारतीय जनता पार्टी विधायकों के मामले पर बंगलौर हाई कोर्ट की एक नई पीठ बुधवार को सुनवाई करेगी.

वहीं पाँच निर्दलीय विधायकों के मामले की सुनवाई एक तीसरी बेंच दो नवंबर को करेगी.

पहले इन मामलों पर सोमवार को फैसला सुनाया जाना था लेकिन सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों के विचारों में भिन्नता के कारण दोनों न्यायधीशों ने इस मामले की सुनवाई एक नई खंडपीठ से करवाने का फ़ैसला किया.

जहाँ मुख्य न्यायाधीश केहर सिंह ने विधान सभा अध्यक्ष के फ़ैसले को सही ठहराया वहीं न्यायाधीश एन कुमार इससे असहमत थे.

दोनों जजों के बीच दल-बदल क़ानून के इस्तेमाल को लेकर मतभेद थे.

कर्नाटक विधान सभा अध्यक्ष ने पहले विश्वास मत के ठीक एक दिन पहले 16 विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य क़रार दे दिया था.

इसके बाद राज्य विधान सभा में कुछ ही दिनों के अंतराल पर दो-दो बार विश्वास मत पर मतदान करवाया गया.

कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बी येदुरप्पा ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के निर्देश पर चार दिनों में दो बार विश्वास मत हासिल किया.

पहला मत 11 अक्तूबर को वॉयस वोट यानि ध्वनि मत से हुआ था मगर इसमें बाग़ी विधायकों को हिस्सा नहीं लेने दिया गया था जिसके कारण राज्यपाल ने इसे मानने से इनकार कर दिया था.

नाखुश येदुरप्पा दोबारा बहुमत साबित करने को राज़ी हो गए और फिर उन्होंने दो दिन बाद 14 अक्तूबर को सदन में 106 विधायकों का समर्थन साबित किया.

भाजपा और राज्यपाल के बीच टकराव की मुख्य वजह यह थी कि राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वो 11 बाग़ी भाजपा विधायकों और पाँच सरकार विरोधी निर्दलीय विधायकों को अयोग्य घोषित ना करें.

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