मध्यस्थों के बहिष्कार का आहवान

अलगाववादी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में कहा कि कश्मीर समस्या पर केंन्द सरकार द्वारा मध्यस्थ नियुक्त किया जाना एक धोखा है.

सैयद अली शाह गिलानी ने कहा " मध्यस्थ नियुक्त किया जाना एक धोखा है, साठ साल के बाद भी मालूम ही नहीं है कि लोग क्या चाहते है ? मतलब साफ है कि वक़्त बरबाद करो".

'कश्मीर के लिए आज़ादी' नाम से आयोजित सेमिनार में सैयद अली शाह गिलानी समेत सभी वक्ताओं को कश्मीरी पंडितों के कड़े विरोध का सामना करना पडा.

सैयद अली शाह गिलानी के साथ तो कार्यक्रम की शुरुवात में ही धक्का मुक्की हुई.पुलिस द्वारा प्रदर्शनाकारियों को सभागार से हटाए जाने के बाद ही ये कार्यक्रम शुरु हो सका.

कश्मीरी पंडितो का कहना था कि वो एक अलगाववादी नेता को भारत के ख़िलाफ बोलने नहीं दे सकते.सेमिनार में कई जाने माने लोगों ने कश्मीर की अज़ादी का समर्थन किया.

विरोध

माओवादी चिंतक वरवर राव ने कहा कि वो आज़ाद कश्मीर के समर्थक हैं. उन्होने कहा, " भारत में जितने भी लोग दिल्ली का विरोध कर रहें है, वो क्रांतिकारी लोग हैं, लोकतांत्रिक लोग है, दलित हैं, मुस्लिम हैं, महिलाएं है, वो सब लोग भी कश्मीर की आज़ादी के समर्थक हैं. "

लेखिका अंरुधती राय ने भी कश्मीर की आज़ादी का समर्थन किया. साथ ही कश्मीर मे मौजूद अत्यधिक सेना पर भी उन्होने चिंता जताई.

अंरुधती राय ने कहा, " हर कश्मीरी एके 47 की नली से साँस लेता है."

जब अंरुधती राय सर्वव्यापी न्याय की बात कर रही थी तो कम संख्या में मौजूद कश्मीरी पंडितो ने वहाँ हंगामा कर दिया.कश्मीरी पंडितो ने कहा कि जब उन्हें अपना घर बार छोड़ना पड़ा... क्या वो न्याय था.

हंगामा शांत होने के बाद अंरुधती राय ने कहा, " कश्मीरी पंडितो के साथ जो हुआ वो गलत था."

साथ ही उन्होंनें मंच के लिए दो सवाल भी उठाए. पहला ये कि कश्मीर के लिए आज़ादी का मतलब क्या है. और क्या आज़ाद कश्मीर में सबके लिए न्याय होगा.

इसके बाद सैयद अली शाह गिलानी जब बोलने के लिए खडे़ हुए तो फिर सभागार में हगांमा हुआ. चार-पाँच कश्मीरी पंडित तिरंगा लहराते हुए 'वंदे मातरम' के नारे लगा रहे थे तो कश्मीरी युवा आज़ादी के साथ-साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ कश्मीर के नारे लगा रहे थे.

मामला लगभग हाथापाई पर जा पहुँचा और पुलिस ने बीच बचाव कर कश्मीरी पंडितों को बाहर निकाला.

हंगामें के बाद बोलते वक्त सैयद अली शाह गिलानी ने अंरुधती राय के सवालों का सीधा जवाब दिया. उन्होने कहा, " सेना से मुक्ति कश्मीर के लिए आज़ादी है और आज़ाद कश्मीर में सभी के लिए समान न्याय की वह गारंटी देते हैं."

सैयद अली शाह गिलानी ने जम्मू कश्मीर के लिए भारत सरकार के आठ सूत्री पैकेज को भी नकार दिया. साथ ही उन्होने मध्यस्थों का बहिष्कार करने का भी आहवान किया.

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में तनाव के सिलसिले में बात करने के लिए नियुक्त किए गए वार्ताकारों ने गुरुवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और कश्मीर की समस्या के हल के लिए अपनी रणनीति के बारे में चर्चा की.

केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में नियुक्त किए गए इन तीन वार्ताकारों का कहना है कि उनके लिए कश्मीर के विभिन्न पक्षों से बातचीत की प्रक्रिया काफी मुश्किल लेकिन वे खुले दिमाग से सभी पक्षों से बातचीत करेंगें.

जाने माने पत्रकार दिलीप पडगाँवकर, सूचना आयुक्त एमएम अंसारी और शिक्षाविद राधा कुमार की इस समिति को गठित करने का फैसला सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक मे लिया गया था

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