'लांसेट के आँकड़े सही नहीं'

Image caption लांसेट के अनुसार हर साल कई लोगों की मौत मलेरिया के कारण होती है

भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉ नाटा मेनाब्डे का कहना है कि लांसेट की रिपोर्ट में भारत में मलेरिया से जुड़े आँकड़े बढ़ा चढ़ाकर बताए गए हैं.

लांसेट की रिपोर्ट में भारत में मलेरिया से मरने वालों की संख्या हर साल तकरीबन दो लाख बताई गई है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन लांसेट के इन आकड़ों से बिल्कुल सहमत नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष मलेरिया के कारण पंद्रह हज़ार मौतें होती हैं. लांसेट के आँकड़ों पर भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉक्टर नाटा मेनाब्डे कहती हैं,‘‘लांसेट के लिए जिन डॉक्टरों ने यह रिपोर्ट लिखी है ये उनकी ज़िम्मेदारी है उन्होंने कुछ ज्यादा ही आँकड़े बढ़ा चढ़ा कर बताए हैं. मलेरिया से मरने वाले लोगों की संख्या इतनी अधिक नहीं है. हमारे आँकड़े कम हो सकते हैं लेकिन लांसेट ने जितने बताए हैं उतने तो बिल्कुल नहीं है.’’

जब मैंने मेनाब्डे से ये पूछा कि क्या भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देश में मलेरिया या किसी अन्य बीमारी के भी सही आँकड़े जुटा पाना संभव है तो उनका कहना था कि ये काम मुश्किल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में बहुत क़दम उठाए गए हैं और जो विधि अपनाई जा रही है वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है.

उनका कहना था, ‘‘लांसेट की इस रिपोर्ट में जिस विधि की बात की गई है वो बातचीत पर आधारित है. इस विधि से सही आँकड़े पता लग पाना मुश्किल है. डब्ल्यू एच ओ उन्हीं मामलों को मलेरिया मानता है जिसकी लैब पुष्टि कर देती है. यही तरीका सही है और सभी को मान्य है. लांसेट के आकड़े बहुत अधिक बताए गए हैं जो सही नहीं प्रतीत होते.’’

हालांकि डॉक्टर मेनाब्डे ने माना कि डबल्यूएचओ के आँकड़े भी पूर्ण रुप से सही नहीं हो सकते हैं. उनका कहना था कि हो सकता है कि डब्ल्यूएचओ में जो संख्या है वो कम हो.

लांसेट की रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टरों ने फील्ड में काम करने वाले लोगों की मदद से ये रिपोर्ट बनाई है. लांसेट के अनुसार फील्ड में काम करने वाले लोगों ने बीमार और बीमार के परिवारों से बात की जिसके बाद इन मामलों को लैब में डॉक्टरों के पास भेजा गया.

लांसेट की रिपोर्ट और विश्व स्वास्थ्य संगठन मलेरिया से मरने वाले लोगों की संख्या को लेकर आपस में सहमत भले ही न हों लेकिन एक बात तय है कि चिकित्सा जगत में बड़ी उपलब्धियों के बावजूद आज भी भारत में हज़ारों की संख्या में लोग मलेरिया जैसी बीमारी के कारण मारे जा रहे हैं.

संबंधित समाचार