ये गिनती नहीं आसान

सलवा जुड़ुम
Image caption नक्सल प्रभावित इलाक़ों में जनगणना का काम टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में यूँ तो जनगणना के पहले चरण का काम सितम्बर महीने में ही पूरा कर लिया जाना था मगर राज्य के नक्सल प्रभावित कई इलाक़ों में लोगों की गिनती के इस काम से अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं.

ख़ास तौर पर बस्तर संभाग के कई ऐसे इलाक़े हैं जहाँ जनगणना संभव नहीं हो पा रही है. यह छत्तीसगढ़ के वे इलाके हैं जो पूरी तरह से माओवादियों के नियंत्रण में हैं. चूँकि इन इलाक़ों में जनगणना के पहले चरण का काम संपन्न नहीं हो पाया है इसलिए सरकार ने अब इसके लिए 31 अक्तूबर तक समय-सीमा बढ़ा दी है. बस्तर संभाग के कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, बस्तर और दंतेवाड़ा के जंगली इलाकों में ख़ौफ़ ने अपने पांव पसार रखे हैं.

इन इलाकों में सदियों से कोई नहीं गया है.ख़ास तौर पर नारायणपुर ज़िले का बहुत बड़ा भू-भाग ऐसा है जहाँ आज़ादी के बाद से सरकारें राजस्व और वन का भी सर्वे कराने में असमर्थ रही हैं. बस्तर संभाग का 40 हज़ार वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा ऐसा है जहाँ माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है जिसे वह 'जनता की सरकार' कहते हैं.

जनगणना के ख़िलाफ़ हैं माओवादी

दंतेवाड़ा के जिला अधिकारी आर. प्रसन्ना के अनुसार माओवादी नहीं चाहते हैं कि इन इलाकों में लोगों की गिनती की जाए.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा:"कई इलाकों में जनगणना करने वालों को माओवादियों ने या तो प्रवेश नहीं करने दिया,या फिर उन्हें मार पीट कर भगा दिया.इससे इस काम में लगे कर्मचारियों में ख़ौफ़ है. उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. हमने भी सरकार को बता दिया है कि इन इलाकों में जनगणना करना मुश्किल होगा." छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि कई इलाकों में माओवादियों नें जनगणना कर्मियों के घुसने पर प्रतिबन्ध की घोषणा कर दी है. वह कहते हैं, "यह बहुत मुश्किल इलाक़े हैं. कई इलाक़ों में तो कर्मचारियों ने अपनी जान हथेली पर रख कर पहले चरण में घरों के पंजीकरण का काम किसी तरह पूरा किया है.मगर बहुत सारे इलाके अब भी बचे हुए हैं."

चुनौतियां

निदेशालय के एक अधिकारी, जिन्होंने अपना नाम नहीं लिखे जाने का अनुरोध किया, का कहना है कि सरकार ने अब छत्तीसगढ़ में जनगणना के पहले चरण का काम पूरा करने की समय सीमा बढ़ा कर 31 अक्तूबर कर दी है. "हम उम्मीद करते हैं कि कुछ इलाकों में घरों के पंजीकरण का काम हो सकेगा." मगर बस्तर संभाग के आयुक्त आर श्रीनिवासुलु मानते हैं कि माओवादियों के प्रभाव वाले इलाकों में जनगणना का काम कराना मुश्किल काम है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा:"जहाँ तक संभव हो पायेगा वहां तक जनगणना का काम होगा. जो इलाके छूट जायेंगे वह छूट जायेंगे. इससे पहले कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में ऐसा हो चुका है." हालांकि दंतेवाड़ा के कलक्टर ने सुझाव दिया है कि राशन की दुकानों, साप्ताहिक हाट और बाज़ारों में इस काम को किया जा सकता है.

मगर बीजापुर के एक सुदूर इलाके में जनगणना में लगे एक शिक्षक मानते हैं कि यह संभव नहीं हो पायेगा.

अपना अनुभव बताते हुए वह कहते हैं:"प्रतिबन्ध के बावजूद मैंने झूठ बोलकर कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना का काम करने की कोशिश की. मगर जब माओवादियों को पता चला तो मुझे उनके सामने पेश किया गया. मुझे उनसे माफ़ी मांगनी पड़ी" शिक्षक कहते हैं कि जनवितरण प्रणाली की दुकानों,हाट या बाज़ारों में यह काम इस लिए संभव नहीं हो पायेगा क्योंकि माओवादियों ने गाँव के लोगों को जनगणना के खिलाफ सख्त हिदायत दे रखी है. हालांकि सरकार ने छत्तीसगढ़ में पहले चरण में जनगणना के काम की समय सीमा को बढ़ा कर 31 अक्तूबर कर दिया है,बस्तर संभाग के ही लगभग एक हज़ार गाँव ऐसे हैं जहाँ यह कवायद पूरी नहीं की जा सकती है.

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