मध्यस्थों का दल श्रीनगर पहुँचा

पडगाँवकर
Image caption वार्ताकार हर महीने हफ़्ते-दस दिन के लिए कश्मीर आएँगे

भारत सरकार नियुक्त तीन मध्यस्थ अपने चार दिवसीय कश्मीर दौरे पर श्रीनगर पहुँच गए हैं.

सैयद अली शाह गिलानी जैसे कट्टरपंथी और मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ जैसे उदारवादी नेता समेत कई प्रमुख अलगाववादी नेताओं ने उनसे मुलाक़ात नहीं करने की घोषणा की है.

इन नेताओं का कहना है कि नियुक्त मध्यस्थों के नामों पर विचार करने पर साफ़ हो जाता है कि भारत सरकार कश्मीर समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है.

श्रीनगर पहुँचने पर मध्यस्थों के दल के प्रमुख और प्रसिद्ध पत्रकार दिलीप पडगाँवकर ने कहा कि वे कश्मीरी समाज के हर तबके के लोगों से मिल कर उनकी राय लेंगे. उन्होंने अलगाववादी नेताओं से भी मिलने की भी इच्छा व्यक्त की.

राजनीतिक समाधान का लक्ष्य

पडगाँवकर ने कहा कि मध्यस्थों की कश्मीर यात्रा अपने आप में कोई घटना नहीं बल्कि एक प्रक्रिया का हिस्सा है, और मध्यस्थ हर महीने हफ़्ते-दस दिन के लिए राज्य में रहेंगे. उन्होंने कहा कि हर यात्रा के बाद एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी.

उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य होगा कश्मीर समस्या का एक व्यापक राजनीतिक समाधान."

श्रीनगर रवाना होने से पहले मध्यस्थों ने शुक्रवार को दिल्ली में निर्वासित कश्मीरी पंडितों के एक संगठन पनुन कश्मीर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की.

केंद्र सरकार ने भारत प्रशासित कश्मीर में चार महीनों तक चले जनांदोलन के बाद एक आठ सूत्री कार्यक्रम के तहत मध्यस्थों के दल का गठन किया है.

आम कश्मीरियों में इस प्रक्रिया को लेकर ज़्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है. लोग इसे समस्या को आगे के लिए टालने की नीति के रूप में देखते हैं.

कई प्रेक्षक इस बात की ओर भी ध्यान दिलाते हैं कि मध्यस्थों की भूमिका अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से कुछ हफ़्ते पहले ही शुरू हुई है.

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