पहला चुंबन और पहला प्यार

दून स्कूल को प्लेटिनम जुबली समारोह

भूटान नरेश जिग्मे वांगचुक ने दून स्कूल के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा- आप में से कई लोगों की चाहत अभी यही होगी- पहला चुंबन और पहली प्रेमिका....ज़रूर...होनी भी चाहिए... जीवन को भरपूर जिएँ और उसके हर पल को और उसके हर पहलू का आनंद लें.

भूटान के युवा नरेश ने जब मशहूर दून स्कूल के सभागार में ये बातें कहीं, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

उन्होंने कहा, "पढ़ाई के साथ-साथ प्रकृति से भी प्रेम करें और समाज के सरोकारों से जुड़ें ताकि 50 और 60 साल की उम्र में आप जब पीछे मुडकर देखें तो संतोष हो कि आपने एक सार्थक जीवन जिया."

मशहूर दून स्कूल के प्लैटिनम जुबली समारोह में जिग्मे वांगचुक बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा, "दून स्कूल को लड़कियों को भी दाखिला देना चाहिए. मैं जिस भी शिक्षण संस्थान में जाती हूँ, देखती हूँ कि छात्राएँ छात्रों से ज़्यादा अच्छा करती हैं. फिर दून स्कूल में उन्हें क्यों न प्रवेश मिले."

अधिकार

शिक्षा के अधिकार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को भी सार्वभौम अधिकार बनाया जाना चाहिए.

दून स्कूल में 75 साल के इतिहास में गौरव करने लायक बहुत कुछ है लेकिन गौरवमयी परंपरा का हिस्सा छात्राएँ क्यों नहीं बन सकती. यानी लड़कियों को दून स्कूल में दाखिला क्यों नहीं मिलता.

दरअसल ये सुझाव और सवाल उठाया उत्तराखंड की राज्यपाल मार्ग्रेट अल्वा ने. इस चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव से एकबारगी दून स्कूल के हेडमास्टर भी हैरान से रह गए.

स्कूल प्रबंधन ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के प्रस्ताव का सम्मान करते हुए कहा कि इस पर गौर किया जाएगा.

हैरानी

स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैकलॉलिन ने कुछ हैरानी और कुछ चुटकी में कहा कि कल से ही इस पर काम शुरू हो जाएगा.

दून स्कूल की स्थापना वर्ष 1935 में एसके दास की पहल पर हुई थी. स्कूल के पहले बैच के कुछ छात्र भी यहाँ हंसी-मज़ाक के अंदाज़ में अपने पुराने दिनों को याद करते नज़र आए.

इसी बैच के एक छात्र महेश चंद शर्मा देहरादून के जिलाधिकारी भी रहे. उन्होंने शायराना अंदाज़ में कहा- कब निकल गई उम्र पता ही नहीं चला उसी को ढूँढ़ रहे हैं कमर झुकाए हुए.

दून स्कूल के इस ख़ास मौक़े पर देश-विदेश के 5000 से ज़्यादा लोग देहरादून आए हैं. इनमें प्रमुख हैं कपिल सिब्बल, कमलनाथ, विक्रम सेठ, रामचंद्र गुहा, अश्विनी कुमार और नंदन नीलकेणी.

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