अमित शाह को 'राज्य निकाला'

अमित शाह
Image caption अमित शाह को शुक्रवार को ज़मानत मिली थी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह की ज़मानत के ख़िलाफ़ सीबीआई की याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई होने तक उन्हें गुजरात से बाहर जाने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अमित शाह से पूछा है कि क्यों न उनकी ज़मानत रद्द कर दी जाए. अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार रात को याचिका दाखिल करके तुरंत सुनवाई की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आफ़ताब आलम और जस्टिस आरएन लोढ़ा की खंडपीठ ने शनिवार शाम को सुनवाई हुई.

सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील केटीएस तुलसी ने कहा कि अमित शाह की ज़मानत के बाद गवाहों को बहुत बड़ा ख़तरा है. उन्होंने ये भी कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है.

केटीएस तुलसी ने जजों से अपील की कि अगर उनकी ज़मानत पर रोक नहीं लग सकती है, तो उन्हें अगली सुनवाई तक गुजरात राज्य से बाहर भेज दिया जाए.

जजों ने इस बारे में जब अमित शाह की वकील बीना मदान से पूछा, तो उन्होंने अमित शाह से बात की.

बीना मदान ने सुनवाई के दौरान ही अमित शाह से फ़ोन पर बात की और इसके लिए सहमति जताई. तो अब अगली सुनवाई होने तक अमित शाह गुजरात से बाहर रहेंगे. अमित शाह रविवार को गुजरात से बाहर चले जाएँगे.

आरोप

सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्जी मुठभेड़ मामले में अमित शाह को 25 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था. सीबीआई कोर्ट ने अमित शाह की ज़मानत याचिका कई बार रद्द की थी.

इसके बाद ही अमित शाह ने हाई कोर्ट की शरण ली थी. हाई कोर्ट में दाखिल अपनी ज़मानत याचिका में अमित शाह ने सीबीआई पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था. शुक्रवार को गुजरात हाई कोर्ट ने अमित शाह को ज़मानत दे दी थी और रात में उन्हें जेल से छोड़ दिया गया था.

जबकि सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में अमित शाह पर हत्या, अपहरण, फिरौती और साज़िश रचने का मामला दर्ज किया है. सीबीआई ने अमित शाह और 15 अन्य को इस मामले में अभियुक्त बनाया है.

वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी की एक फ़र्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी.

संबंधित समाचार