मीडिया से नाराज़ अरुंधति

अरुंधति रॉय
Image caption अरुंधति रॉय ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए हैं

जानी-मानी लेखिका अरुंधति रॉय ने अपने घर के बाहर हुई घटना को लेकर मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर आंधे घंटे तक नारेबाज़ी और तोड़फोड़ की थी. अरुंधति रॉय का आरोप है कि मीडिया इन घटनाओं पर मूक दर्शक बनी रही.

अपने एक बयान में अरुंधति रॉय ने कहा है- 31 अक्तूबर की सुबह 11 बजे क़रीब 100 लोग मेरे घर आए. इन लोगों ने मेरे घर का गेट तोड़ दिया और अंदर घुसकर तोड़-फोड़ की.

अरुंधति ने कहा कि इन लोगों ने कश्मीर पर दिए उनके बयान के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और सबक सिखाने की धमकी दी. उन्होंने कहा कि उस समय कई मीडिया समूहों के पत्रकार वहाँ मौजूद थे.

पिछले दिनों अरुंधति ने कहा था कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है.

अरुंधति के मुताबिक़ इस घटना के बाद पुलिस ने उन्हें सलाह दी कि भविष्य में उन्हें अपने घर के आस-पास ओबी वैन खड़े दिखे, तो वे उन्हें बताएँ.

पुलिस का कहना था कि उन्हें इससे ये संकेत मिलते हैं कि यहां कोई ग्रुप आने वाला है.

आरोप

अरुंधति ने आरोप लगाया कि जून महीने में भी दो मोटरसाइकिल सवार आए थे और उनके घर की खिड़कियों पर पत्थर मारे थे.

उस समय भी उनके साथ न्यूज़ चैनल्स के दो कैमरामैन थे.

अरुंधति ने सवाल उठाया कि मीडिया और ऐसे ग्रुपों के बीच किसी प्रकार की सहमति है.

उन्होंने अपने बयान में कहा- अगर मीडिया मौक़े पर पहले से मौजूद रहती है, तो क्या उसे इस बात की गांरटी माना जाए कि ऐसे हमले और प्रदर्शन हिंसात्मक होगें. अगर वहाँ कोई आपराधिक या अप्रिय घटना घटती है, तो क्या मीडिया उसका हिस्सा बन जाती?

अरुंधति ने कहा कि ये सवाल बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि कुछ टीवी चैनल और समाचार पत्र उनके ख़िलाफ़ ग़ुस्सा दिलाने वाले समूहों को भड़काने की प्रकिया में शामिल हो रहे हैं.

सनसनीखेज़ पत्रकारिता के इस दौर में ख़बर की रिपोर्टिंग और ख़बर बनाने के बीच की जो लकीर है, वो धुंधली होती जा रही हैं.

उन्होंने कहा, "इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि कुछ लोगों को टीआरपी की वज़ह से कुर्बान ही कर दिया जाए."

अरुंधति ने कहा कि सरकार ने ये संकेत दिए हैं कि वो उनके और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एक सम्मेलन में कश्मीर की आज़ादी पर दिए गए वक्तव्य पर राजद्रोह का आरोप नहीं लगाएगी, वहीं ऐसे संगठन ये घोषणा कर रहे हैं कि वे उन्हें नहीं छोड़ेंगे.

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