मायावती सरकार की नई पेंशन योजना

उत्तर प्रदेश की महिलाएँ
Image caption इस योजना के लिए पहले दस महिलाओं का चयन किया गया.

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने राज्य में ग़रीबी रेखा से नीचे के परिवारों को 300 रूपए महीने आर्थिक मदद देने की एक योजना शुरू की है.

क़रीब 31 लाख लोगों को लाभ पहुँचाने वाली इस योजना पर लगभग 1100 करोड़ का सालाना का ख़र्च आएगा.

उत्तर प्रदेश में इस समय लगभग एक करोड़ सात हजार परिवार बीपीएल यानि ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की सूची में हैं.

करीब साढे़ तीन साल पहले मई, 2007 में मायावती जब चौथी बार मुख्यमंत्री बनी थीं तो ग़रीबों विशेषकर दलित समुदाय में बड़ी उम्मीदें जगी थीं.

लेकिन इधर बहुजन समाज पार्टी के समर्थकों में इस बात को लेकर असंतोष पनप रहा था कि मायावती की सरकार ग़रीबों को बीपीएल कार्ड भी नहीं दे पा रही है.

राज्य सरकार ने एक सर्वेक्षण करवाकर उन परिवारों को भी बीपीएल सूची में रखने की मांग की जो साल 2002 के सर्वे में छूट गए थे. लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा करना मंजूर नहीं किया.

योजना

उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों का कहना है कि 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री महामाया ग़रीब आर्थिक मदद योजना' ऐसे ही ग़रीब लोगों के लिए है ताकि वे भी परिवार के लिए सस्ता राशन खरीद सकें.

लेकिन योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिन्हें अन्य किसी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलता है.

पुरुष पैसे का दुरूपयोग न करें इसीलिए प्रशासन परिवार की महिला मुखिया के नाम बैंक में खाता खोलेगा.

मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार के अपने बंगले पर एक समारोह में 10 ग़रीब महिलाओं को चेक और पासबुक देकर योजना की शुरुआत की.

मायावती ने कहा, ''हमारी सरकार की कोशिश है कि नकद धनराशि मुहैया कराने वाली इस योजना से हर ग़रीब परिवार रोज़मर्रा की अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सके.''

मुख्यमंत्री के अनुसार योजना का लाभ पाने वालों में लगभग 50 फ़ीसदी अनुसूचित जाति के लोग होंगे क्योंकि उनमें ग़रीबों की तादाद ज्यादा होती है.

लखनऊ ज़िले की जिन 10 महिलाओं को योजना का चेक मिला है उनमें फूलमती और शशि शामिल हैं.

फूलमती के दो बेटे हैं लेकिन वे माँ बाप का खर्च नहीं उठाते और उन्हें मज़दूरी करके अपना ख़र्च चलाना पड़ता है.

इसी तरह चार बच्चों की माँ शशि पति की मौत के बाद बड़ी मुश्किल से बच्चों को पाल रही है. दोनों का का कहना है कि इस पैसे से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी.

पेंशन

इस योजना के लागू होने के बाद राज्य में सरकारी ख़ज़ाने से पेंशन पाने वालों की तादाद तक़रीबन एक करोड़ को पहुँच जाएगी.

उत्तर प्रदेश में प्रशासन की ओर से बुढापा पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांग पेंशन की भी व्यवस्था है. खजाने पर इन सभी योजनाओं का बोझ सालाना 3600 करोड़ रूपए होगा.

अर्थशास्त्री अरविंद मोहन के अनुसार, ''इस योजना से सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा जो सही दिशा में एक क़दम है क्योंकि लाखों ग़रीब परिवार सिर्फ़ तकनीकी कारणों से बीपीएल सूची से बाहर हैं.''

उनका कहना था कि बेहतर होता कि सरकार सीधे आर्थिक अनुदान देने की बजाय ग़रीब परिवारों को इस लायक बनाने में मदद करती ताकि उनके परिवार की नियमित आमदनी बढ़े और उन्हें स्वयं रोजगार का अवसर मिले.

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