यमन पार्सल बम मामले में छात्रा रिहा

प्रिंटर बम
Image caption ये दोनों बम प्रिंटर की टोनर कार्ट्रिज में छिपाए गए थे.

यमन प्रशासन ने उस छात्रा को रिहा कर दिया गया है जिसे पिछले हफ़्ते ब्रिटेन और दुबई में कार्गो जहाज़ से संदिग्ध पार्सल बम भेजने के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था.

गिरफ़्तार की गई छात्रा का नाम हनान अल-समावी है. हनान को उसकी मां के साथ शानिवार को हिरासत में किया गया था.

यमन में अधिकारियों ने ये स्पष्ट किया है कि हनान को उनके पहचान पत्र के चोरी होने की वज़ह से ग़लतफ़हमी का शिकार होना पड़ा.

चरमपंथी गुट से संबंध नहीं

अधिकारियों ने पहले कहा था कि हनान मेडिकल की छात्रा हैं लेकिन बाद में कहा गया कि वे सना विश्वविद्यालय में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग पढ़ती हैं और उनके किसी इस्लामिक चरमपंथी गुट से संबंध नहीं मालूम होते.

बीबीसी के मध्यपूर्व संवावदाता का कहना है कि यमन में अधिकारियों की जांच अब उस संदिग्ध बम बनाने वाले पर केंद्रित हो गई है जिसका नाम इब्राहिम हसन अल-अज़ीरी बताया जा रहा हैं.

यमन में रहने वाले इब्राहिम सऊदी अरब मूल के हैं. उनका संबंध अरब के प्रायद्वीप में अल-काय़दा से भी बताया जा रहा हैं.

यात्री विमानों में पार्सल बम

ग़ौरतलब है कि यमन में हर देश को जाने वाले कार्गो जहाज़ नहीं है इसीलिए ये पार्सल बम पहले यात्री विमानों से लाए गए थे.

इससे पहले क़तर एयरवेज़ ने दावा किया था कि पिछले हफ़्ते जो दो पार्सल बम यमन से भेजे गए थे उनमें से एक को यात्री विमानों से ले जाया गया था.

इस बम में पीईटीएन नामक विस्फोटक था जो हवाई अड्डे की सामान्य सुरक्षा जांच में पकड़ में नहीं आता.

दूसरा बम ब्रिटेन के ईस्ट मिडलैंड हवाईअड्डे पर मिला. ये दोनों बम प्रिंटर की टोनर कार्ट्रिज में छिपाए गए थे.

इन पार्सल बमों को भेजने के लिए अमरीकी मालवाहक कंपनी यूपीएस और फ़ैडएक्स का इस्तेमाल किया गया था और इनपर अमरीका के शिकागो शहर के सिनगॉग के पते लिखे थे.

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