'जटिल मुद्दों पर शीघ्र निष्कर्ष ग़लत'

निरुपमा राव
Image caption ओबामा की यात्रा के दौरान आउटसोर्सिंग और वीज़ी फ़ीस में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के मामले पर अमरीका की ओर से स्पष्ट समर्थन नहीं मिलने के मामले पर भारत ने कहा है कि ये काफ़ी जटिल विषय है और उसपर कोई शीघ्र निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए.

बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ये विषय 'काफ़ी मुश्किल और जटिल' है और स्पष्ट रूप से भारत के समर्थन में कोई बयान नहीं दिया था.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे से पहले भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव ने कहा है कि अमरीका वैश्विक मामलों में भारत के योगदान की संभावनाओं के बारे में जानता है और दोनों देश इस विषय पर बातचीत करते रहते हैं.

ओबामा ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में 'डुएल यूज़ टेक्नोलॉजी' के मुद्दे को भी जटिल बताया था.

इसपर गुरुवार को विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "ओबामा इसे जटिल कहते हैं तो वे सही हैं. हमें उनके बयान पर ऐसे निष्कर्ष नहीं निकालने चाहिए (कि वो इस मामले पर भारत के हक़ में नहीं हैं). दोनों देशों की राय है कि तकनीक निर्यात के क्षेत्र में लगे नियंत्रण की स्थिति पर पुनर्विचार किया जाए ताकि इन नियंत्रणों को पहले कम किया जा सके और बाद में पूरी तरह से हटाया जा सके."

परमाणु उर्जा सहयोग

विदेश सचिव ने कहा परमाणु ऊर्जा के सहयोग के क्षेत्र में दोनों देश ख़रीद-फ़रोख़्त करने के दौर में प्रवेश कर चुके हैं.

उन्होंने कहा कि भारत अमरीकी प्रतिनिधिमंडल को परमाणु दायित्व बिल के बारे में भी जानकारी देगा और उनकी शंकाओं को दूर करेगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने बुधवार को कहा था कि इस मुद्दे पर अमरीका की कुछ चिंताएं हैं और दोनों पक्ष उन्हें दूर करने के लिए बात कर रहे हैं.

निरूपमा राव ने उम्मीद जताई की कई अमरीकी कंपनियां भारत में असैनिक परमाणु ऊर्जा में निवेश करेंगी.

उनका कहना था कि बहुत जल्दी एक अमरीकी वाणिज्य दल भारत का दौरा करने वाला है.

आउटसोर्सिंग

निरुपमा राव ने कहा कि ओबामा की यात्रा के दौरान वीज़ा फ़ीस में बढ़ोतरी और आउटसोर्सिंग पर भी बातचीत होगी, विशेषकर व्यापारिक संस्थाओं की वार्ताओं में ये विषय उठाए जाएंगे.

विदेश सचिव के अनुसार भारत अमरीका को आउटसोर्सिंग पर अपने पक्ष से अवगत करवाएगा.

हेडली के बारे में बात करते हुए निरुपमा राव ने कहा कि अमरीका ने भारत से सारी जानकारी साझा की है.

ये पूछे जाने पर कि क्या अफ़गानिस्तान में भारतीय हितों पर भी ओबामा से बात की जाएगी, विदेश सचिव ने कहा,"अफ़गानिस्तान की स्थिति हमारी वार्ताओं में हमेशा प्रमुखता से उठती है.भारत को अफ़गानिस्तान में स्थिरता की चिंता है. हम अफ़गानिस्तान में मज़बूत लोकतंत्र चाहते हैं, जिसमें सभी अफ़गान नागरिकों की हिस्सेदारी हो."

निरूपमा राव का कहना था कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ दोनों देश पहले ही एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और इस दौरे में उसकी ठोस रूपरेखा पर बात होगी.