'अमरीका की आक्रामकता नहीं रही'

नीलोत्पल बासु
Image caption बासु का कहना है कि वाम दल अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों का विरोध करते रहेंगे.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि वो अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा का विरोध सड़कों पर उतर कर करेंगे.

पार्टी के नेता नीलोत्पल बासु ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों का वो हमेशा से विरोध करते रहे हैं और ये विरोध ओबामा की भारत यात्रा के दौरान भी जारी रहेगा.

उल्लेखनीय है कि सभी वाम दलों ने आठ नवंबर को ओबामा की यात्रा के विरोध में धरना प्रदर्शन की घोषणा की है.

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यह पूछे जाने पर कि वाम दल सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन संसद सत्र को जब ओबामा संबोधित करेंगे तो वाम दल उसका बहिष्कार क्यों नहीं कर रहे हैं, बासु का कहना था, ‘‘हमें तो अभी तक पता भी नहीं है कि ये कैसा संबोधन होगा. चर्चा होगी या क्या होगा. हमें अभी तक इस बारे में सरकार से या लोकसभा स्पीकर से कोई जानकारी भी नहीं दी गई है कि ये कैसा सत्र होगा. बहस हो तो हम वहां भी अमरीका को बेनकाब करेंगे.’’

जब अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश 2006 में भारत आए थे तो भी वाम दलों ने उनका कड़ा विरोध किया था लेकिन क्या इस बार विरोध के स्वर कम नहीं हैं, बासु कहते हैं, ‘‘देखिए वो समय और था. तब अमरीका इराक़ युद्ध में भारत को सीधे सीधे खींचना चाह रहा था और इसका सभी दलों ने विरोध किया था. संसद में प्रस्ताव पारित किया गया था कि भारत सेनाएं न भेजे. अभी स्थिति वैसी नहीं है.’’

तो क्या ओबामा की नीतियां जॉर्ज बुश से अलग हैं, वो कहते हैं, ‘‘नहीं. बिल्कुल नहीं. अमरीका की विदेश नीति में चाहे इराक़ हो या अफ़गानिस्तान एक निरंतरता है लेकिन उतनी आक्रामकता नहीं है क्योंकि अब अमरीका वैसी शक्ति नहीं रहा. बहुध्रुवीय विश्व हो रहा है. आर्थिक स्थिति अमरीका की ख़राब है. इन कारणों से वो आक्रामकता नहीं है जो पहले थी. अमरीकी नीतियों में निरंतरता है लेकिन सुर बदल गए है.’’

परमाणु समझौते पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने वाले वाम दलों का अमरीका विरोध सभी जानते हैं लेकिन लगता है कि वो भी ओबामा का वैसा विरोध नहीं कर रहे जैसा जॉर्ज बुश का. कारण चाहे अमरीकी मंदी हो या कोई और.

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