बटुए में 786 का नोट और बुलंद हौसला

जागेश्वर राम यादव
Image caption जागेश्वर अपने ग्राहकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो गए हैं

शौक़ कई तरह के होते हैं. किसी को सिक्के इकठ्ठा करने का शौक़ तो किसी को माचिस के डिब्बे इकठ्ठा करने का शौक़. देश विदेश के डाक टिकट इकठ्ठा करना तो बहुत पुराने शौक़ में शुमार है. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 786 का नंबर बड़ा शुभ माना जाता है. ट्रकों और बसों में यह प्रमुखता के साथ सामने लिखा हुआ होता है या फिर दुकानों के सामने बोर्ड पर.

बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी 786 वाले अंक से जुड़े कई यादगार सीन अब भी लोगों के ज़हन में हैं. ख़ास तौर पर बड़े परदे के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म ज़ंजीर और कुली में उन्होंने 786 नंबर के बिल्ले वाले कुली की भूमिका निभाई. दोनों ही फिल्मों में बड़े नाटकीय ढंग से उस 786 नंबर के बिल्ले नें हीरो की कई बार जान बचाई. हालांकि इस अंक से जुडी कोई ठोस धार्मिक मान्यता नहीं है, लेकिन लोग इसे शुभ मानते हैं. इसे शुभ मानने वालों में सभी समुदाय के लोग हैं.

छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव के जागेश्वर राम यादव को 786 अंक के नोट संजोने का शौक है. पिछले तीन सालों में जागेश्वर ने आठ से दस हज़ार रूपए ऐसे नोटों के इकट्ठे किये हैं जिनका आखिरी अंक 786 हो. इन नोटों में पांच रूपए से लेकर एक हज़ार रूपए तक के नोट हैं. जागेश्वर फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित विधायक आवास में कैंटीन चलाते हैं.

जागेश्वर कहते हैं, "मेरे ही गाँव के शेख ज़ीज़ हमेशा कहते थे कि जागेश्वर तुम कैंटीन चलाते हो. सुबह से शाम तक बहुत लोग आते होंगे. अगर 786 अंक वाले नोट मिलें तो मेरे लिए रख देना. मैं तुमसे ले लूँगा."

भाग्यशाली नोट

Image caption जागेश्वर इन नोटों की प्रदर्शनी लगाएँगे

बस शेख अज़ीज़ के कहने पर उन्होंने 786 अंक वाले नोटों को इकठ्ठा करना शुरू कर दिया. कुछ ही दिनों में शेख अज़ीज़ की मृत्यु हो गई. "लेकिन इसी दौरान मुझे इन नोटों को जमा करने में मेरी रूचि जाग गई." अब अपनी कैंटीन में और बाज़ार में जागेश्वर के दिमाग में सिर्फ एक ही बात रहती है. उनकी आँखें एक ही चीज़ ढूढती हैं. और वह है 786 अंक वाले नोट.

वह कहते हैं: "मुझे पता नहीं कि इसके पीछे क्या मान्यता है लेकिन यह मेरे लिए भाग्यशाली है. उसी तरह से जिस तरह अमिताभ बच्चन के लिए ज़ंजीर और कुली फिल्म में साबित हुआ था".

"सिर्फ घर ही नहीं मेरे बटुए में भी एक नोट तो 786 अंक वाला हमेशा रहता है. लेकिन जबसे मेरे पास यह नोट हैं मेरी स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. अब इन नोटों के सहारे मैं दूसरे व्यवसाय में भी अपनी किस्मत आज़माना चाहता हूँ." जागेश्वर के इस शौक नें उन्हें अपने ग्राहकों में काफी लोकप्रिय बना दिया है. अब तो उनके जाननेवालों के पास अगर कोई 786 अंक वाला नोट आता है तो वह उसे जागेश्वर को लाकर दे देते हैं.

जागेश्वर का कहना है कि कुछ सालों के बाद वह इन नोटों कि प्रदर्शनी लगाएँगे.

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