दोनों देशों को होगा मुनाफ़ा: ओबामा

ओबामा-मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने कहा कि ये समझौते दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और विश्वास को दर्शाते हैं.

अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कई द्विपक्षीय समझौते किए हैं.

द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रुप से संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुप्तचर सूचनाओं के आदान प्रदान के अलावा सुरक्षा क्षेत्र में अब गृह मंत्रालय और अमरीकी होमलैंड सिक्योरिटी मिलकर काम करेंगे.

ओबामा ने कहा कि उच्च तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर किए गए समझौते के तहत भारत को उच्चतम तकनीक और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात किया जाएगा.

एनएसजी में सदस्यता

अमरीका ने 45 सदस्यों वाले ‘न्यूक्लीयर सप्लायर्स ग्रुप’ (एनएसजी) में भी भारत की सदस्यता को समर्थन देने की घोषणा की.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उच्च तकनीक के निर्यात पर लगे अमरीका के प्रतिबंध को हटाए जाने के इस फैसले का स्वागत किया.

उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और विश्वास को दर्शाता है.

दस अरब डॉलर के बीस समझौते

कार्गो विमानों की खरीद

ओबामा ने घोषणा की, कि भारत अमरीका से 10 सी-17 कार्गो विमान खरीदेगा जिसके फलस्वरुप अमरीका में 22,000 नौकरियां पैदा होंगी.

उन्होंने कहा कि भारत और अमरीका के बीच हुए समझौते दोनों देशों के लिए मुनाफ़े का सौदा साबित होंगे.

आउटसोर्सिंग पर ओबामा की चुनौती

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रतिबंधित कंपनियों की सूची से भारतीय कंपनियों और संगठनों को हटाए जाने के अमरीका के फ़ैसले की भी घोषणा की.

उन्होंने बताया कि अनुंसधान और तकनीकी विकास से जुड़ी डीआरडीओ, बार्क और इसरो जैसे संगठन अब अमरीकी कंपनियों के साथ सहयोग कर सकेंगे.

सुरक्षात्मक रवैया

दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बढ़ाने की ज़रूरत पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बाज़ार को लेकर सुरक्षात्मक रवैया किसी के लिए भी लाभदायक नहीं.

उन्होंने कहा कि भारत, बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अमरीकी कंपनियों के निवेश का खुलकर स्वागत करता है.

परमाणु अप्रसार

मनमोहन सिंह ने कहा कि अगले पांच साल में इस क्षेत्र में भारत को एक खरब अमरीकी डालर के निवेश की ज़रूरत होगी.

इसके अलावा दोनों देशों के बीच परमाणु शस्त्रों के प्रसार को रोकने में सहयोग, शिक्षा क्षेत्र में सहयोग, अफ़गानिस्तान और अफ्रीका में साझा परियोजनाएं चलाने, पूर्वी एशिया पश्चिमी एशिया, पाकिस्तान आदि को लेकर नीतियों में सहयोग बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की घोषणा भी की.

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