भारत और अमरीका रणनीतिक साझेदार

ओबामा-मनमोहन
Image caption ओबामा के बयान का लगभग सभी दलों ने स्वागत किया है.

भारत और अमरीका ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने और मज़बूत करने का एलान किया है.

सोमवार देर रात भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि 21वीं सदी में दुनिया भर में शांति क़ायम रखने के लिए एक सक्षम और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र संघ की ज़रुरत है.

मनमोहन सिंह ने ओबामा के उस बयान का स्वागत किया जिसमें ओबामा ने कहा था कि आने वाले वर्षों में अमरीका एक विस्तृत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद देख रहा है जिसमें भारत एक स्थायी सदस्य होगा.

दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जो देश 21वीं सदी में नेतृत्व करना चाहते हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे देश संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य यानि शांति और सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए ज़िम्मेदारी स्वीकार करें.

दोनों देशों ने पूर्वी और मध्य एशिया तथा मध्य पूर्व में भारत और अमरीका के बीच सामरिक सहयोग को और बढ़ाने पर बल दिया.

अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए ओबामा ने कहा कि भारत के सहयोग से अफ़ग़ानिस्तान को आत्म निर्भर बनने में मदद मिलेगी.

भारत और अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में कृषि और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संयुक्त परियोजना शुरु करने का फैसला किया है.

दोनो नेताओं के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में असल सफलता तभी मिलेगी जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की धरती से पनप रही चरमपंथी गतिविधियों को समाप्त कर दिया जाए.

हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हुए दोनों पक्षों ने लश्कर तैयबा समेत आतंकवाद के हर ढ़ांचे को नष्ट करने की वकालत की.

ओबामा ने पाकिस्तान से साफ़ शब्दों में कहा कि वो मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के कटघरे में खड़ा करें.

असैनिक परमाणु समझौता

अमरीका ने परमाणु और रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी आयात की एक पुरानी अड़चन दूर करते हुए भारतीय कंपनियों पर लगी पाबंदी हटा लिया है, साथ ही आंतरिक सुरक्षा पर ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए नए सहयोग की घोषणा की गई है.

ओबामा ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानि एनएसजी में भारत के प्रवेश पर भी अपनी सहमति दे दी, इससे परमाणु दिग्गजों के क्लब में भारत की सदस्यता का रास्ता साफ़ हो गया है.

भारत- अमरीका असैनिक परमाणु समझौते को अमल में लाने के लिए उठाए गए क़दमों का दोनों नेताओं ने स्वागत किया है.

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अमरीकी कंपनियों से बातचीत कर रहा है.

दोनों नेताओं ने विश्वास जताया कि जल्द ही इस क्षेत्र मे व्यवसायिक सहयोग शुरु हो जाएगा जो आर्थिक विकास को और बढ़ावा देगा और दोनो देशों में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगें.

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