ओबामा के विरोध में धरना और प्रदर्शन

ओबामा के विरुद्ध प्रदर्शन
Image caption कई संगठनों ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा का विरोध किया है.

दिल्ली के जंतर मंतर पर इकट्ठा हुई हर आवाज़ बराक ओबामा के विरोध में नारे लगा रही थी.

विरोध प्रदर्शन करनेवाले लोगों के पास विरोध करने के अलग अलग कारण थे. इनमें प्रमुख थे भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े संगठन जिनका नेतृत्त्व किया पीड़ितों को एक जगह पर इकट्ठा करनेवाले और अब भोपाल पीड़ितों की पहचान बन चुके सतीनाथ साडंगी ने.

साडंगी का कहना था कि "मेक्सिको की खाड़ी में हुई तेल दुर्घटना के लिए जो बराक ओबामा अरबों डॉलर का मुआवज़ा ब्रिटिश पेट्रोलियम से ले चुके हैं, वही ओबामा भारत में हुई दुनिया की उस सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के लिए चुप क्यों हैं जिसके लिए एक अमरीकी कंपनी ज़िम्मेदार है."

भोपाल पीड़ितों के समर्थन में वहाँ मौजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा ने भी ओबामा यात्रा के विरुद्ध अपना मत रखा.

डी राजा का कहना था, "अमरीका की सरकार दोहरे मानदंड अपना रही है. "

'अमरीकी साम्राज्यवाद'

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा को अमरीकी साम्राज्यवाद का प्रतीक बतानेवाले अखिल भारतीय वाम समन्वय की ओर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), लिबरेशन की कविता कृष्णनमूर्ति ने डी राजा के सुर में सुर मिलाते हुए बात को आगे बढ़ाया और कहा कि जो क़रार हो रहे हैं वो भारत के हित में नहीं है.

Image caption भोपाल गैस त्रासदी के प्रभावित लोगों के समर्थन में भी लोग इकट्ठा हुए.

स्वदेशी जागरण मंच के डॉक्टर अश्विनी महाजन का कहना था कि खुदरा क्षेत्र में वॉलमार्ट और टेस्को जैसी मल्टीनैशनल कंपनियों यानि विदेशी निवेश करने की बात कर रही भारत सरकार को अमरीका के बढ़ावा देने से बहकने की बजाय सचेत रहने की ज़रूरत है.

इसके अलावा और भी कई गुटों ने अलग अलग बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया.

उनकी माँग थी कि अगर अमरीका भारत से व्यापार कर रहा है और उसकी वजह से नैकरियों के अवसर भी भारत में पैदा होंगे तो उन नौकरियों के स्तर भी अमरीका जैसे ही होने चाहिए.

यानि कि काम करने का बेहतर माहौल, आठ घंटे की नौकरी और मोटी तनख़्वाह.

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