'पाक आतंक का रास्ता छोड़े तो बातचीत संभव'

ओबामा और मनमोहन
Image caption ओबामा और मनमोहन सिंह के बीच बातचीत हुई है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान आंतकवाद से प्रेरित धमकियों से दूर हटे तो भारत उसके साथ सभी मुद्दों पर सार्थक बातचीत करने को तैयार है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कश्मीर पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बड़ी ही विनम्रता से पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश दिया.

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘जहां तक पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्तों की बात है तो मैंने हमेशा कहा है कि एक मज़बूत, शांत और उदार पाकिस्तान भारत, दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया के हित में है. हम पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध हैं और चाहते हैं कि सारे विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत हो जिसमें के शब्द (कश्मीर) भी शामिल है. हम कश्मीर के मुद्दे से डरते नहीं हैं.’’

मनमोहन सिंह का कहना था, ‘‘ये मेरा आग्रह है कि आप एक साथ बातचीत और आतंकवाद की मशीन को सक्रिय नहीं रख सकते . एक बार पाकिस्तान आतंकवाद से प्रेरित धमकियों से दूर हो जाए तो भारत खुशी से सार्थक बातचीत करने के लिए तैयार है ताकि सारे विवाद सुलझ सकें.’’

कश्मीर के मुद्दे पर राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दोनों देशों के बीच मुद्दों को सुलझाना दोनों देशों के हित में है.

उनका कहना था, ‘‘दोनों देशों के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए अगर उन्हें लगता है कि हमारी कोई भूमिका है तो हम उसे सहर्ष निभाने को तैयार हैं. मुझे उम्मीद है कि अभी नहीं तो आगे चलकर दोनों देश बातचीत करेंगे.विश्वास बढ़ाने के क़दम उठाए जाएंगे.’’

आउटसोर्सिंग

आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में ओबामा का कहना था कि वो इन रिश्तों को जिस तरह देखते हैं उसमें भारत और अमरीका दोनों के लिए स्थिति अच्छी है.

उनका कहना था, ‘‘अमरीका में भी कई लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं. मैं इसलिए यहां आया हूं ताकि वापस जाकर कह सकूं कि देखिए मैं आपके लिए ये नौकरियां भारत से लेकर आया हूं.’’

इस सवाल पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘‘जहां तक भारत की बात है. भारत अमरीका से नौकरियां नहीं छीन रहा है. जहाँ तक हमारा आउटसोर्सिंग उद्योग है मेरा मानना है कि इसने अमरीकी उद्योग की क्षमता बढ़ाने में मदद ही की है. अभी जो सौदे हुए हैं वो आधारभूत ढांचे के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं इसलिए हम कह सकते हैं कि हम बेहतरीन साझेदारी की दिशा में हैं. ’’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता के सवाल पर पूछे गए सवाल को राष्ट्रपति ओबामा ने टाल दिया और कहा कि वो इस पर वो भारतीय संसद को अपने संबोधन में कुछ कहेंगे.

भारत और अमरीका ने आतंकवाद में बढ़े सहयोग की बात की.

गुप्तचर सूचनाओं के आदान प्रदान के साथ साथ गृह मंत्रालय और अमरीकी होमलैंड सिक्योरिटी के बीच सहयोग, परमाणु शस्त्रों के प्रसार को रोकने में सहयोग, शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग, अफ़गानिस्तान और अफ्रीका में साझा परियोजनाएं चलाने, पूर्वी एशिया पश्चिमी एशिया, पाकिस्तानी आदि नीतियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा के साथ साथ स्वच्छ ऊर्जा मानसून के पूर्वानुमान पर भी सहयोग करेंगे.

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