भारतीय सांसदो से ओबामा ने क्या कहा?

बराक ओबामा

भारत के संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के संबोधन के मुख्य अंश:

" भारत जिस आतिथ्य सत्कार के लिए जाना जाता है उसका हमने पिछले तीन दिनों में काफ़ी लुत्फ उठाया... बहुत धन्यवाद...

भारत उभर नहीं रहा, भारत उभर चुका है. भारत-अमरीका के बीच साझेदारी 21वीं सदी की सबसे अहम साझेदारी होगी.

भारतीय सभ्यता हज़ारों वर्षों से दुनिया को राह दिखती रही है.

सूचना प्राद्योगिकी की जड़ें भारत में मौजूद रही है. भारत ने दुनिया को शून्य जैसा अविष्कार दिया. भारतीय कवि (गुरुदेव टैगोर) ने ऐसे विश्व की कल्पना की - 'व्हेयर माइंड इज़ विदाउट फियर एंड हेड इज़ हेल्ड हाई.'

महात्मा गाँधी जैसे दूरदर्शी के फ़लसफ़े और जीवन से मैंने हमेशा प्रेरणा ली है. उन्होंने कहा, "टू बी द चेंज यू सीक इन द वर्ल्ड."

यह गाँधी और उनके संदेशों का अमरीका और दुनिया भर में प्रसार का नतीजा है कि मैं एक अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में आपके सामने खड़ा हूँ.

मणि भवन जाकर मैंने गर्व का अनुभव किया जहाँ पर गाँधी और मार्टिन लूथर किंग दोनों ने समय बिताया था. राजघाट पर मैने बहुत विनम्रता से सिर झुकाया. मार्टिन लूथर किंग ने गांधी के फ़लसफ़े को 'एक मात्र तार्किक और नैतिक पद्धति कहा.'

जब भारत आज़ाद हुआ तो अनेक ने कहा कि बहुत ग़रीब देश है असफल रहेगा.....आपने हरित क्रांति कर भूख मिटाई, आपने सुपर कंप्यूटर बनाए....आप ग्लोबल अर्थव्यवस्था के इंजन बने हैं. आपने दिखाया है कि भारत का फ़लसफ़ा सभी को साथ लेकर चलता है.

भारत लोकतंत्र के बावजूद नहीं बल्कि लोकतंत्र की वजह से ही सफल हुआ.

भारत और अमरीका न्याय, बराबरी और लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध हैं.

'भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बने'

गुटनिरपेक्षता और शीत युद्ध के वे दिन चले गए जब अमरीका और भारत में विपरीत धुव्र पर थे.

भारत की आवाज विश्व स्तर पर और बुलंदी से सुनी जा रही है. हम चाहते हैं कि वह सुरक्षा परिषद में हो और उसका स्वागत करेंगे. अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार होने चाहिए और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होना चाहिए.

हम सुरक्षा, अंतरिक्ष के क्षेत्रों में भारत का सहयोग चाहते हैं. हम संयुक्त तौर पर शोध कर सकते हैं. हमारी खुली अर्थव्यवस्था है. हम जी-20 के ज़रिए दोहा चरण में प्रयास कर सकते हैं ताकि वैश्विक कारोबार से सभी को फ़ायदा हो.

मुंबई हमले इसलिए हुए क्योंकि भारत लोकतंत्र है. मुंबई के हमलावरों को सज़ा मिलनी चाहिए और पाकिस्तान को अपने यहाँ आतंकवादियों का सफ़ाया करना होगा.

परमाणु ऊर्जा का हक़ तो है लेकिन ईरान समेत सभी देश परमाणु हथियारों को ख़त्म करने की ओर भी क़दम उठाएँ.

'जय हिंद'

हमने प्रशासन को अमरीका में पारदर्शी बनाया है. आपने सूचना का अधिकार क़ानून बनाकर ऐसा काम किया है. मैं सूचना प्राद्योगिकी की मदद से एक पंचायत से रू-ब-रू हुआ.

भारत जब वैश्विक शक्ति के रूप में सामने आता है तो उसके सामने यह जिम्मेदारी होगी कि वह उनके साथ खड़ा हो जिनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाया जा रहा है. लोगों की आज़ादी अहम है. महात्मा गांधी ने दुनिया भर में लोकतंत्र का समर्थन किया है.

हर देश अपना रास्ता खोजेगा. कोई एक ही रास्ता नहीं. लेकिन जब शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष होता है जैसे बर्मा में हुआ तो उसका दमन स्वीकार्य नहीं है. वहाँ चुनाव में पूरी धांधली हुई. कई बार भारत ने कभी ऐसा नहीं किया कि जो अपने लिए नहीं बोल सकते उनके विश्व स्तर पर आवाज़ बुलंद की जाए.

भारत ने एक दशक में वो कर दिखाया है जो लोग सदियों में करते हैं.हर भारतीय ये जान ले हम केवल आपकी सराहना नहीं करेंगे बल्कि हर पल आपका साथ देंगे.

यदि चाहें तो हर कोई मेहनत से काफ़ी कुछ कर सकता है. डॉक्टर अंबेडकर जैसे दलित ने बहुत कुछ कर दिखाया और संविधान तक लिख दिया.

भारत को पूर्व के देशों के साथ बातचीत बढ़ाना चाहिए, उनसे संबंध रखना चाहिए.

हम ये जान लें कि साथ-साथ क्या कुछ नहीं कर सकते हैं. हम भारत के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलेंगे. साथ ऐसी दुनिया में रहेंगे जिसमें न्याय हो. धन्यवाद.जय हिंद !"

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