'चार करोड़ बेरोज़गार, खेती से लोग हटे'

Image caption रोज़गार वाले लोगों की श्रेणी में दिहाड़ी मजदूरों की भारी तादाद है.

श्रम मंत्रालय के एक सर्वेक्षण के अनुसार साल 2009-10 में भारत के 9.4 प्रतिशत लोग लंबी बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं.

छह महीने से ज़्यादा की बेरोज़गारी को लंबी बेरोज़गारी की श्रेणी में रखा जाता है.

श्रम मंत्रालय का ये आंकड़ा राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन की ओर से जारी 2.8 प्रतिशत लंबी बेरोज़गारी से तीन गुना ज़्यादा है.

लेकिन ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि जिन लोगों को रोज़गार वाले लोगों की श्रेणी में रखा गया है उनमें 43.9 प्रतिशत ऐसे हैं जो ख़ुद के रोज़गार में हैं, 16.8 ही नियमित वेतन वाली नौकरियों में हैं जबकि 39.3 ऐसे हैं जो दिहाड़ी मजदूरी से जुड़े हुए हैं.

कृषि पर निर्भरता

एक ख़ास बात ये भी है कि इस सर्वेक्षण के अनुसार अब आधे से भी कम लोग जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं. इसके अनुसार अब 45.5 प्रतिशत ही कृषि क्षेत्र में रोज़गार कर रहे हैं.

लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों ख़ुद के रोज़गार से जुड़े लोगों में से 69.4 प्रतिशत कृषि, मत्सय पालन या जंगलों से जुड़े व्यवसाय में हैं.

ये सर्वेक्षण 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 300 ज़िलों में किया गया और इसमें 15 से 59 साल के लोगों को शामिल किया गया.

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबी बेरोज़गारी की दर 10.1 प्रतिशत आंकी गई जबकि शहरी इलाकों में ये दर 7.3 प्रतिशत की है.

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में बेरोज़गारी की दर 14.6 प्रतिशत की है जबकि पुरूषों में ये आठ प्रतिशत है.

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ने 2007-08 के सर्वेक्षण में बेरोज़गारों के प्रतिशत को 2.8 यानि मात्र एक करोड़ दस लाख लोगों को बेरोज़गार बताया था. जबकि इस ताज़ा सर्वेक्षण में चार करोड़ बेरोज़गार बताए गए हैं.

इसके अलावा इस सर्वेक्षण के अनुसार रोज़गार में लगे हुए 85 प्रतिशत लोग किसी सामाजिक सुरक्षा सुविधा के दायरे में नहीं हैं यानि प्रोविडेंट फंज, स्वास्थ्य सुविधा, पेंशन इत्यादि से वो वंचित हैं.

संबंधित समाचार