राजा पर गरमाई राजनीति

ए राजा
Image caption ए राजा इससे पहले भी इस्तीफ़ा देने से इनकार कर चुके हैं

दूरसंचार मंत्री ए राजा को लेकर राजनीति गरमाने लगी है.

माना जा रहा है कि ए राजा को मंत्री बनाए रखने पर अंतिम फ़ैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार की रात सिओल से लौटने के बाद करेंगे.

इस बीच ए राजा की पार्टी डीएमके उनके समर्थन में उतर आई है और ख़ुद ए राजा ने कहा है कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगे.

उधर एआईएडीएमके की नेता जे जयललिता ने कांग्रेस को खुला आश्वासन दिया है कि अगर डीएमके यूपीए से हटती है तो वे अपने सांसदों और कुछ समान विचार वाले सांसदों के साथ यूपीए के बचाव में आएँगीं.

उल्लेखनीय है कि ए राजा पर आरोप हैं कि उन्होंने 2-जी स्पैक्ट्रम के आवंटन में अनियमितताएँ कीं जिससे सरकार को हज़ारों करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ.

विपक्षी दल उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं और इस मांग को लेकर लगातार दो दिन संसद की कार्यवाही भी ठप कर चुके हैं. विपक्षी दल कहते रहे हैं कि सरकार को 60 हज़ार करोड़ की राजस्व हानि हुई लेकिन मीडिया सीएजी की एक रिपोर्ट के हवाले से कह रहा है कि सीएजी ने कहा है कि सरकार को 1.70 लाख करोड़ का नुक़सान हुआ.

ये रिपोर्ट अभी संसद के पटल पर नहीं रखी गई है.

इस्तीफ़े से इनकार

ए राजा ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए एक बार फिर इस्तीफ़ा देने की संभावना से इनकार किया है.

उन्होंने कहा कि वह अदालत में इस बात को साबित कर देंगे कि सब कुछ क़ानून के मुताबिक़ ही हुआ है.

जैसा कि वे पहले भी कह चुके हैं, उन्होंने कहा, "2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन क़ानून के अनुसार किया गया है."

दूरसंचार मंत्री ने कहा कि वे स्पेक्ट्रम आवंटन पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, क्योंकि यह मामला अदालत में चल रहा है.

उन्होंने कहा कि दूरसंचार मंत्रालय ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जो हलफ़नामा दाख़िल किया गया है, उसमें सब कुछ कह दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि इस हलफ़नामे में दूरसंचार मंत्री का बचाव किया गया है.

सीएजी की रिपोर्ट पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट अभी संसद में पेश नहीं की गई है और जब रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी तब वे इस पर कोई टिप्पणी करेंगे.

डीएमके बचाव में

Image caption डीएमके नेता राजा को दलित होने की वजह से नहीं हटाना चाहते

यूपीए गठबंधन में डीएमके एक अहम घटक दल है और वह इस पर अड़ा हुआ है कि ए राजा को दूरसंचार मंत्री के पद से न हटाया जाए.

एक निजी टेलीविज़न चैनल से बातचीत करते हुए डीएमके के प्रमुख करुणानिधि ने ए राजा का समर्थन करते हुए कहा है कि उनको हटाए जाने का सवाल ही नहीं है क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी किया है वह नियमानुसार ही किया है.

इस सवाल पर कि क्या वे इस विषय पर कांग्रेस से चर्चा करेंगे, उन्होंने कहा कि फ़िलहाल वे इसकी ज़रुरत नहीं समझते.

सीएजी की रिपोर्ट के सवाल पर उनका कहना था कि इस रिपोर्ट के बारे में उन्होंने सुना है लेकिन रिपोर्ट अभी देखी नहीं है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट देखने के बाद ही इस पर बात करनी चाहिए जिससे कि इसकी ग़लत व्याख्या न हो.

जयललिता का प्रस्ताव

इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके की धुर विरोधी एआईडीएमके की नेता जे जयललिता ने कांग्रेस को प्रस्ताव दिया है कि यदि ए राजा को हटाने पर डीएमके यूपीए से समर्थन वापस लेती है तो वे सरकार को बचाएँगीं.

एक टेलीविज़न चैनल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ समान विचार वाली पार्टियों से बात की है और वे यूपीए को समर्थन करने को तैयार हैं.

उनका कहना था, "हमारे पास नौ सांसद हैं और कुछ समान विचार वाले दल हैं तो कांग्रेस किस बात की चिंता कर रही है."

हालांकि अभी कांग्रेस की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन डीएमके ने जयललिता का प्रस्ताव की खिल्ली उड़ाते हुए कहा है कि पहले वे अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से तो निबट लें.

ए राजा ने कहा, "उनको ऐसी पेशकश करने का कोई नैतिक आधार नहीं है, क्योंकि वह ख़ुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हैं."

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