गंदगी पर चला चालान का डंडा

कचरा
Image caption उन लोगों का चालान किया जाता है जो गंदगी फैलाते हैं और अपना कचरा निर्धारित स्थान पर नहीं डालते.

राह चलते या अपने घर की सफ़ाई कर सड़कों और गलियों में कूड़ा फैलाना अगर आपकी आदत है तो इससे तौबा कर लें.

शहरों को साफ रखने की मुहिम के चलते में लखनऊ नगर निगम अधिकारियों ने गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ चालान करके जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है.

भारत के शहरों में कहीं भी कूड़ा कचरा फेंकना आम बात है लेकिन अब प्रशासन इसके खिलाफ़ कमर कसता नज़र आ रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि अब तक इस अभियान का सकारात्मक असर रहा है.

‘नगर निगम अधिनियम’ में गंदगी फैलाने वालों के ख़िलाफ कानूनी कार्यवाही का प्राविधान तो पहले से है, लेकिन इसके तहत चालान करके जुर्माना लगाने का अभियान पिछले दिनों शुरू किया गया है.

बीमारियां

वजह है पुराने लखनऊ शहर में बड़े पैमाने पर फैलती बीमारियां. उलटी दस्त और बुखार की जैसी बीमारियों की वजह से इन इलाकों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो गई है. कुछ मोहल्लों में तो घर-घर में लोग बीमार पड़े.

बीमारियाँ फैलने से लोगों का ध्यान गंदी-नालियों और कूड़े के ढेरों की तरफ गया. अखबारों में फोटो छपे और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ नगर निगम की भी आलोचना होने लगी. जनहित याचिका के माध्यम से मामला हाईकोर्ट तक पहुँच गया.

इसके बाद अधिकारियों ने उन लोगों का चालान करना शुरू किया, जो गंदगी फैलाते हैं, और अपना कचरा निर्धारित स्थान पर नहीं डालते.

ऐसे ही एक इलाके के सैनिटरी इन्सपेक्टर डीके डे ने बताया कि ये चालान नगर निगम अधिनियम की धारा 368(3) के अंतर्गत किए जाते हैं.

जुर्माना

डे कहते हैं, '' बहुत से लोग हैं जो सफ़ाई होने के बाद अपना कूड़ा सड़कों पर डाल देते हैं. वे अपने घरों में कूड़ेदान नहीं रखते या दोने-पत्तल इधर-उधर फैला देते हैं. उन्हें कई बार मना किया जाता है लेकिन वो जब नहीं मानते तो चालान किया जाता है. जिन लोगों का चालान होता है, उनकी पेशी मजिस्ट्रेट के सामने होती है और उन्हें 400 से 600 रुपए तक जुर्माना भरना पड़ता है. ''

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार पिछले महीने 625 लोगों का चालान किया गया.

सैनिटरी इन्स्पेक्टर का कहना है कि चालान और जुर्माने का अच्छा असर पड़ रहा है. एक बार जिसको सज़ा हो जाती है वह फिर इधर-उधर कचरा डालने से डरता है.

नगर निगम उन लोगों को भी नोटिस दे रहा है, जिन लोगों के प्लॉट खाली पड़े हैं और पड़ोसी वहां कूड़ा डाल देते हैं.

कानून

अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि जो लोग एक बार चालान के बाद दोबारा गंदगी फैलाते पकड़े जाएंगे उनके ख़िलाफ पुलिस में रपट भी लिखाई जा सकती है.

पेशे से वकील जेके जैन का कहना है कि भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में इस बात का प्रावधान है कि जो लोग जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करें उन्हें दण्डित किया जा सके, लेकिन प्रशासन इस कानून का इस्तेमाल नहीं करता.

Image caption एक बार जिसको सज़ा हो जाती है वह फिर इधर-उधर कचरा डालने से डरता है.

मगर सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि नगर निगम के पास केवल 3200 सफ़ाई कर्मचारी हैं, जो 40 लाख की आबादी के लिए बहुत कम है.

इसका परिणाम यह होता है कि बहुत से मोहल्लों में न तो झाड़ू लगती है और न ही कूड़ा रिहायशी इलाकों से हटकर निर्धारित ठिकानों तक पहुंच पाता है.

समस्या

शिकायत है कि सफाई कर्मचारी भी कूड़ा उठाने के बजाय नालों में धकेल देते हैं.

लखनऊ नगर निगम में इस समय केवल छः सैनिटरी इन्स्पेक्टर हैं जबकि पहले ये संख्या 40 थी.

कई खंड ऐसे हैं जहां डाक्टरों की कमी से स्वास्थ्य अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं.

अधिकारियों का कहना कि सफाई कर्मचारियों, सैनिटरी इंस्पेक्टर्स और हेल्थ अफसरों की कमी एक बड़ी समस्या है और इसे दूर किए बिना शहर की गंदगी दूर नहीं हो सकती.

हालांकि आम लोग अगर अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए कूड़ा इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित स्थान पर डालें तो गंदगी और बीमारियों में कमी लाई जा सकती है.

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