मरा बाघ, लापता बाघ

बाघ
Image caption अब भारत में मात्र 1400 बाघ ही बचे हैं.

राजस्थान के सरिस्का अभयारण्य में एक बाघ का शव मिलने से वन विभाग में खलबली मच गई है.

साथ ही अभयारण्य का एक और बाघ पिछले कुछ दिनों से लापता है. बाघ की इस गुमशुदगी ने अधिकारियों की चिंता और बढ़ा दी है.

वैसे तो बाघ की मृत्यु की जाँच के आदेश दे दिए गए है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ये दो वनराजों में अपने क्षेत्राधिकार के झगड़े का नतीजा है.

पिछले माह रणथम्भोर में भी एक बाघ ऐसे ही मृत पाया गया था लेकिन सरिस्का में हुई बाघ की मौत से वहाँ बाघों के पुर्नवास के प्रयासों को धक्का लगा है.

क्षेत्राधिकार की जंग

राज्य के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक आर एन मेहरोत्रा ने बीबीसी से कहा,"इस बाघ को रणथम्भोर से लाकर आबाद किया गया था. ऐसा लगता है कि दो बाघों में क्षेत्राधिकार को लेकर जंग हुई और इसमें एक की मौत हो गई. मौत का ठीक ठीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही सामने आ पाएगा लेकिन हमारे लिए ये एक दुख भरी घटना है."

इस बाघ की मौत के बाद अब सरिस्का में सिर्फ़ तीन बाघिन और एक बाघ रह गए हैं मगर ये अकेला बचा हुआ बाघ वन कर्मियों को पिछले कई दिनों से नज़र ही नहीं आया है.

राजस्थान के वन मंत्री रामपाल जाट ख़ुद सरिस्का पहुंच रहे है जिसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी वहाँ का दौरा करेंगे.

रामपाल जाट कहते हैं कि प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक़ दो बाघों में हुई जंग में एक चल बसा है और दूसरा बाघ शायद घायल हो गया होगा जिसकी तलाश जारी है.

अभयारण्य में मौजूद बाघों की गर्दन पर रेडियो कालर फ़िट किए गए थे ताकि उनकी मौजूदगी के संकेत बराबर वनाधिकारियों को मिलते रहें.

लेकिन रेडियो ने पिछले कुछ दिन से संकेत भेजने बंद कर दिए थे.

शिकारियों के हत्थे

राज्य के अलवर ज़िले में अरावली की पहाडियों में पसरे सरिस्का में लगभग पाँच से छह सालों पहले तक अच्छी संख्या में बाघों की मौजूदगी की बात की जाती थी मगर फिर कहा गया कि सारे बाघ एक-एक कर शिकारियों के हत्थे चढ़ गए जिसके बाद सरिस्का के सदियों पुराने इतिहास में बाघों की दहाड़ ही बंद हो गई.

लिहाज़ा वन अधिकारियो ने पड़ोस के रणथम्भोर से लाकर पांच बाघों को सरिस्का में पुनर्वासित किया. हालांकि तब इस योजना पर कई सवाल उठाए गए थे.

ताज़ा हादसों के बाद इस पर नए तरीक़े से बहस छिड़ गई है.

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