सीएजी रिपोर्ट: राजा ने प्रधानमंत्री की अनदेखी की

राजा
Image caption सीएजी का कहना है कि दूरसंचार मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों की सलाह की अनदेखी की

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी)की रिपोर्ट में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को 2जी स्पैक्ट्रम के आवंटन में प्रधानमंत्री, वित्त और क़ानून मंत्रालय की सलाह की अनदेखी करने का दोषी ठहराया है और कहा है कि इस काम में उचित प्रक्रिया न अपनाने से सरकारी राजस्व को लगभग एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ.

संसद के दोनों सदनों में सीएजी की रिपोर्ट मंगलवार को रखी गई.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरसंचार मंत्रालय ने मांग पत्र की आख़िरी तारीख़ बढ़ाकर 25 सितंबर, 2007 कर दी थी और आवदेन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर तय कर दिए.

नवंबर, 2007 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दूरसंचार मंत्रालय को लिखा था.

रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री ने स्पैक्ट्रम के निष्पक्ष एवं पारदर्शी आवंटन की सलाह दी थी और वित्त मंत्रालय ने स्पैक्ट्रम की कीमत पर मंत्रियों के समूह में विचार करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था.

अनदेखी का आरोप

उप महालेखा परीक्षक लेखा गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन दोनों ही बातों की दूरसंचार मंत्रालय ने अनदेखी की.

हालांकि राजस्व की हानि के अनुमान को ख़ुद सीएजी ने बहस का मुद्दा बताया है लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 3 जी के लिए अपनाई गई दरें 2 जी के मामले में लागू की जातीं तो सरकार को एक लाख 76 हज़ार 645 करोड़ रूपए प्राप्त होते.

सीएजी के मुताबिक 122 में 85 ऑपरेटरों को लाइसेंस उचित तरीके से नहीं दिए गए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाएगा.

इधर विपक्ष 2जी स्पेक्ट्रम की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग को लेकर अड़ा हुआ है.

दरअसल भाजपा, एआईएडीएमके और वामदलों के सांसद ‘स्पैक्ट्रम’ आंवटन घोटाले में राजा की भूमिका की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग कर रहे हैं.

गतिरोध जारी

इस पर मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में हंगामा जारी रहा.

इस वजह से लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी.

संसद में हंगामे को लेकर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सोमवारो को कहा था कि इस मामले की जांच की जा रही है और उस जांच पर एक और जांच की मांग निरर्थक है.

उन्होंने कहा, ''विपक्ष के नेता की देखरेख में लोक लेखा समिति पहले ही इस मामले की जांच कर रही है. इसके नतीजे आने से पहले ही संयुक्त संसदीय समिति से भी जांच कराने की मांग फ़िज़ूल है.''

राजा के खिलाफ़ अपने तेवर और कड़े करते हुए एआईएडीएमके की प्रमुख जे जयललिता ने राजा की गिरफ़्तारी की मांग की है.

उन्होंने कहा है कि दूरसंचार मंत्री ए राजा को तुरंत गिरफ़्तार किया जाए और उन पर भ्रष्टाचार निरोधी क़ानून के तहत मामला दर्ज किया जाए.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे ए राजा ने रविवार को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

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