'सरिस्का में बाघ की मौत हमारी नाकामी'

Image caption छह साल पहले तक सरिस्का में बाघों की दहाड़ सुनाई दिया करती थी

राजस्थान के सरिस्का अभ्यारण्य मे एक बाघ की मौत को केंद्र और राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है.

पड़ोस के रणथंभौर से लेकर सरिस्का में आबाद किये गए इस बाघ की पिछले हफ्ते मौत हो गई थी.

समझा जाता है कि बाघ को ज़हर देकर मारा गया होगा.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सरिस्का का दौरा करने के बाद कहा कि ये हमारी सामूहिक विफलता को इंगित करता है.

लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि इस हादसे के बावजूद बाघों के सरिस्का में पुनर्वास को रोका नहीं जा सकता.

इस बाघ को दो साल पहले रणथंभौर से लाकर सरिस्का के जंगलो में छोड़ा गया था.

इसके बाद चार और बाघ लाए गए जिनमें एक बाघ और तीन मादा बाघ शामिल है.

मगर सबसे पहले लाए गए इस बाघ का शव जंगल में पड़ा पाया गया.

नाकामी

Image caption जयराम रमेश का कहना है कि हादसे के बावजूद बाघों का पुनर्वास नहीं रूकेगा

अधिकारी अब तक इस बाघ की मौत की वजह नहीं बता पाए है.

जयराम रमेश का कहना है कि इसकी मौत के कई कारण हो सकते हैं.

मगर जानकार इसमें ज़हर देने का अंदेशा ज़ाहिर कर रहे हैं.

जयराम रमेश ने कहा,"एक बात ज़रूर है कि ये हमारी सामूहिक नाक़ामयाबी है, इस महकमे का मंत्री होने के नाते मैं भी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता."

इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सरिस्का का दौरा किया और वनराज की मौत पर अफ़सोस व्यक्त किया.

इसके बाद ही वन विभाग ने अपने दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया.

राज्य के वन सचिव वी एस सिंह ने बीबीसी से कहा कि इस बाघ की मौत के तीन कारण हो सकते है.

उन्होंने कहा,"एक कारण ये है कि या तो उसे किसी ने ज़हर दिया हो, या फिर सर्पदंश से ऐसा हुआ हो, या फिर वनराज किसी गंभीर बीमारी से चल बसा हो."

उन्होंने कहा कि जल्दी ही जाँच रिपोर्ट आते ही कारण का पता लग जाएगा.

संख्या

राज्य के अलवर ज़िले में घने वनों से आच्छादित सरिस्का में वर्ष 2004 तक बाघों की दहाड़ सुनाई देती थी.

आख़िरी दौर में वहाँ एक दर्जन से ज़्यादा बाघों की गिनती की गई थी.

मगर सहसा पता चला कि सरिस्का बाघ विहीन हो गया है.

पुलिस ने काफ़ी मेहनत के बाद एक शिकारी गिरोह का पर्दाफ़ाश किया और कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया.

मगर इसके बाद फिर से सरिस्का में बाघ बसाने की माँग जोर पकड़ने लगी तो रणथंभौर से एक एक कर पाँच बाघ लाए गए.

अब एक बाघ की मौत के बाद वहाँ चार बाघ रह गए हैं.

वन अधिकारियो ने इन बाघों की गर्दनों पर रेडियो कॉलर भी लगाए.

मगर अब लगता है कि ये तकनीक कोई काम नहीं आई क्योंकि वन अधिकारियों को पाँच दिन तक इस बाघ का कोई पता नहीं चला.

एक और बाघ अभी लापता है. एस टी 4 नाम का ये बाघ पिछले एक हफ़्ते से भी ज़्यादा समय से सरिस्का में कहँ है इसका पता नहीं चल पा रहा है.

सरिस्का पर बड़ा मानवीय दबाव है. उसके निकट कोई दो दर्जन गाँव आबाद हैं.

फिर धरती को चीड़ कर खनिज पत्थर निकालने वाले लोगों के लिए अरावली का वो हिस्सा जहाँ सरिस्का है, महज़ एक कमाई का ज़रिया है.

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