सरकार को ब्यौरा सौंपने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर कड़ी टिप्पणी की है

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि सुब्रमण्यम स्वामी और प्रधानमंत्री के बीच हुए पत्र-व्यवहार के बारे में शुक्रवार शाम तक एक शपथ पत्र दाख़िल करे.

कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी से कहा है कि अगर वे इस संबंध में कोई दस्तावेज़ दाख़िल करना चाहें तो सोमवार तक कर सकते हैं.

इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.

यह मामला सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के बाद शुरु हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि वे संचार मंत्रालय में 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले के मामले में ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति माँग रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस पर चुप्पी साधे हुए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या वजह थी कि मनमोहन सिंह अनुमति देने के इस आवेदन पर 11 महीनों तक चुप्पी साधे बैठे रहे.

2जी स्पैक्ट्रम घोटाले पर दायर एक और याचिका के मामले में सुनवाई सोमवार को होगी.

सरकार को निर्देश

गुरुवार को न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली के पीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई शुरु होते ही सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमा करने के लिए जो पत्र प्रधानमंत्री को लिखे हैं उन सबका जवाब दिया गया है.

लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ़ एक पत्र का जवाब मिला है और वे पत्र प्राप्ति की सूचना को जवाब नहीं मानते.

इसके बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हुए पत्रव्यवहार को लेकर एक शपथ पत्र दाख़िल करें.

मामले की सुनवाई के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा, "मैंने नवंबर, 2008 से लेकर अब तक प्रधानमंत्री को पाँच पत्र लिखे लेकिन मुझे सिर्फ़ मार्च में एक पत्र का जवाब प्राप्त हुआ."

उनका कहना था, "मेरे पत्रों के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने अगर यह लिखा है कि आपका पत्र मिला, तो मैं इसे जवाब नहीं मानता."

उनका कहना था कि वे ए राजा के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाने की अनुमति मांग रहे थे और प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर चुप्पी साधे बैठा हुआ था.

सरकार को शुक्रवार की शाम तक शपथ पत्र दाख़िल करना है जबकि इस मामले में यदि सुब्रमण्यम स्वामी कोई दस्तावेज़ अदालत के सामने रखना चाहें तो उन्हें सोमवार तक का समय दिया गया है.

अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.

जबकि 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले में मामले में ही दायर प्रशांत भूषण के मामले की सुनवाई अदालत ने सोमवार तक के लिए टाल दी है.

इस मामले में गुरुवार को प्रशांत भूषण ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की एक प्रति दाख़िल की है.

उल्लेखनीय है कि सीएजी ने कहा है कि 2जी स्पैक्ट्रम के लाइसेंस आवंटित करने में कई अनियमितताएँ हुईं जिसकी वजह से सरकार को 1.70 लाख करोड़ रुपयों तक के राजस्व की हानि हुई.

मामला

Image caption बहुत दबाव के बाद राजा ने मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुब्रमण्यम स्वामी को अनुमति न देने के मामले में मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि क्या कोई ज़िम्मेदार अधिकारी किसी शिकायत पर इस तरह से चुप रह सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल इस्तीफ़ा दे चुके केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की अनुमति देने में हुए विलंब को लेकर उठाया था.

जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने दो साल पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ए राजा के ख़िलाफ़ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुमति माँगी थी.

नियमानुसार किसी सरकारी पद आसीन व्यक्ति के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई के लिए अनुमति चाहिए होती है.

लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मामले पर चुप रहे.

अब सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी को इस बात की अनुमति दे दी है कि वे चाहें तो ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर सकते हैं.

चूंकि अब ए राजा संचार मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं इसलिए अब उन पर आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए किसी की अनुमति की ज़रुरत भी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "प्रशासन को सुचारु रुप से चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का समय तय किया है. इतने समय में ज़िम्मेदार अधिकारी को अनुमति दे देनी चाहिए."

सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अब तो 16 महीने हो गए. ज़िम्मेदार अधिकारी यह कह सकता है कि मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकता. लेकिन कोई कार्रवाई न करना और चुप्पी साधे रहना परेशान करने वाला है."

हाल के बरसों में पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ इतनी कड़ी टिप्पणी की है.

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