नौकरियों पर आंध्र-तेलंगाना में फिर ठनी

Telanga Protest
Image caption छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने रबर की गोलिया चलाईं और लठियां बरसाईं.

पुलिस विभाग में नौकरियों को लेकर तेलंगाना समर्थकों और उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों के आंदोलन को देखते हुए भर्ती के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है.

सरकार के इस फैसले से जहां तेलंगाना प्रांत और उस्मानिया के छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है, वहीं आंध्र और रायल सीमा क्षेत्रों के लोगों में बेहद गुस्सा है.

अब इन इलाकों के छात्रों और दूसरे संगठनों ने इस फ़ैसले के विरोध में शनिवार को एक बंद का आह्वान किया है.

इनकी मांग है कि परीक्षाएं समय पर करवाई जाएं क्योंकि ऐसा न करना आंध्र और रायल सीमा के बेरोज़गार युवाओं के साथ अन्याय होगा.

फ्री ज़ोन

परीक्षाएं रद्द करने की मांग को लेकर तेलंगाना की पार्टियों और संगठनों का आरोप था कि इससे तेलंगाना के युवाओं और बेरोज़गारों की हक़ छिन जाएगा.

उनकी मांग है की परीक्षाओं के आयोजन से पहले सरकार राष्ट्रपति के उस आदेश में संशोधन करे जिसके तहत हैदराबाद में पुलिस की नौकरियों के लिए पूरे राज्य के लोग उम्मीदवार बन सकते हैं.

हैदराबाद को फ्री ज़ोन करार दिया गया था.

तेलंगाना समर्थकों की मांग है की यह नौकरियां केवल हैदराबाद और तेलंगाना के लोगों को ही मिलनी चाहिए.

इस मसले पर पहले तो राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था की यह परीक्षाएं कार्यक्रम के अनुसार 18 दिसंबर को ही आयोजित होंगी.

लेकिन हालात उस समय ख़राब हो गए जब ओस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों और दूसरे संगठनों ने अपना आंदोलन और भी तेज़ कर दिया.

बंद का आह्वान

शुक्रवार को ओस्मानिया विश्वविद्यालय के परिसर में काफी उथल-पुथल और हिंसा का माहौल रहा.

छात्रों ने जुलूस निकले और पथराव किया. छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने रबर की गोलिया चलाईं और लठियां बरसाईं.

तेलंगाना राष्ट्र समिति ने परीक्षाओं का विरोध करने के लिए शनिवार को तेलंगाना बंद का आह्वान किया था.

लेकिन शुक्रवार को सरकार के फैसले के बाद टीआरएस ने बंद का आह्वान वापस ले लिया है.

नौकरियों का बंटवारा

टीआरएस के अध्यक्ष के चन्द्रशेखर एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के ज़रिए राष्ट्रपति पर आदेश में संशोधन के लिए दबाव बनाना चाहते हैं.

आंध्र और तेलंगाना प्रांतों के बीच मनमुटाव के कई कारण हैं, जिनमें से एक है सरकारी नौकरियों का बंटवारा.

तेलंगाना समर्थकों का आरोप है की उनकी सरकारी नौकरियों पर आंध्रवासियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है.

यह नया विवाद एक ऐसे समय पर खड़ा हो गया है जब तेलंगाना राज्य की मांग पर विचार के लिए बनाई गई श्रीकृष्ण समिति का काम ख़त्म होने वाला है.

यह समिति दिसंबर के अंत तक केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

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