प्रधानमंत्री ने अपना वकील बदला

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह की ओर से मंगलवार को एक शपथ पत्र दाख़िल करना है

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा पर कार्रवाई के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट के गंभीर सवालों के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आ गया है.

पहली कार्रवाई के रुप में प्रधानमंत्री कार्यालय ने फ़ैसला किया है कि मंगलवार को जब इस मामले की सुनवाई हो तो प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व एटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती करें.

इससे पहले यानी गुरुवार तक सुप्रीम कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम कर रहे थे.

वाहनवती और सुब्रमण्यम दोनों ने इसकी पुष्टि कर दी है.

यह मामला जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका से जुडा़ हुआ है जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा पर क़ानूनी कार्रवाई करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अनुमति मांगी थी लेकिन पांच पत्रों के बाद भी उन्होंने इस पर कोई जवाब नहीं दिया.

सुब्रमण्यम स्वामी की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि ऐसे मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी परेशान करने वाली है.

फिर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश दिए हैं कि वह सुब्रमण्यम स्वामी के पत्रों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्रवाई का विवरण शपथ पत्र के रुप में पेश करें.

यह पहली बार है कि भ्रष्टाचार के किसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री को इस तरह से आड़े हाथों लिया है.

बदलाव

सुप्रीम कोर्ट और विपक्ष दोनों के निशाने पर आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने सु्प्रीम कोर्ट में अपना वकील बदलने का फ़ैसला किया है.

एटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि सरकार ने उनसे कहा है कि वे अगले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व करें.

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के किसी मामले में पहली बार प्रधानमंत्री पर इस तरह से सवाल उठाए हैं

हालांकि उन्होंने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि क्या सरकार की ओर से उन्हें कोई विशेष निर्देश मिले हैं.

सरकार की ओर से यह एक बड़ा परिवर्तन दिखता है. लेकिन सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने इसे परिवर्तन मानने से इनकार किया है.

पीटीआई से उन्होंने कहा, "यह परिवर्तन का सवाल नहीं है बल्कि यह बेहतर सामंजस्य का मामला है. मैं इस मामले में केंद्र सरकार और संचार मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करता रहूँगा लेकिन प्रधानमंत्री का नेतृत्व एटॉर्नी जनरल करेंगे."

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली के पीठ ने कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस मामले में कोई शपथ पत्र दाख़िल किया जाए.

पीठ ने यह निर्देश तब दिए जब गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि उनके पास सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने चुप्पी नहीं साधी थी और सु्ब्रमण्यम स्वामी के हर पत्र का जवाब दिया गया था.

सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि उन्होंने 11 महीनों में पाँच पत्र लिखे लेकिन उन्हें सिर्फ़ एक पत्र का जवाब मिला.

सरकार को शुक्रवार की शाम तक शपथ पत्र प्रस्तुत करना है जबकि सुब्रमण्मय स्वामी को और दस्तावेज़ जमा करने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया है.

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.

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