भाजपा-वामदल: जेपीसी ही चाहिए

ए राजा
Image caption विपक्ष का आरोप है कि मनमोहन सिंह राजा को बचाने की कोशिश करते रहे

भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने शनिवार को कहा है कि वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर संसद में बहस करने के लिए तैयार हैं लेकिन वे इसकी जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग नहीं छोड़ेंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स के लीडरशिप सम्मेलन में बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली और सीपीएम की नेता वृंदा करात ने कहा कि वे संसद में बहस के लिए तैयार हैं लेकिन पहले सरकार जेपीसी की मांग स्वीकार करे.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्षी दलों से आग्रह किया है कि वे संसद में इस मामले पर बहस करें और इस मामले में यदि कोई दोषी पाया जाएगा तो उस पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. लेकिन उन्होंने जेपीसी के गठन पर कोई आश्वासन नहीं दिया है.

उल्लेखनीय है कि जेपीसी की मांग को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र के छह दिनों में कोई कामकाज नहीं हो सका है.

सरकार चाहती है कि विपक्षी दल जेपीसी के गठन की मांग छोड़ दें और जाँच का काम संसदीय लेखा समिति (पीएसी) के लिए छोड़ दिया जाए.

'दोषी पर कार्रवाई हो'

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से जब पूछा गया कि वे संसद में बाधा पहुँचाने की जगह क्या बहस नहीं करना चाहते, तो उन्होंने कहा, "मैं भी संसद में भ्रष्टाचार पर एक शिष्ट बहस देखना चाहता हूँ बशर्ते कि प्रधानमंत्री (जेपीसी की मांग मानकर) सकारात्मक संकेत दें."

जब यही सवाल सीपीएम की पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यदि भ्रष्टाचार पर संसद में बहस होगी तो वह शिष्ट बहस ही होगी."

उन्होंने भी कहा कि इसका एकमात्र रास्ता यह है कि प्रधानमंत्री जेपीसी गठन की मांग स्वीकार कर लें.

भाजपा चाहती है कि 2जी स्पेक्ट्रम के अलावा आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले और राष्ट्रमंडल खेलों में हुई अनियमितता के मामलों में भी जेपीसी का गठन हो.

अरुण जेटली ने कहा, "भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई करने के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का रिकॉर्ड बहुत ख़राब रहा है."

उन्होंने कहा, "इस सरकार ने केंद्रीय सर्तकता आयोग में संदिग्ध नियुक्ति करके और सीबीआई का दुरुपयोग करके भ्रष्टाचार का एक ढाँचा खड़ा कर लिया है."

अरुण जेटली ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को 'वैधानिक संसदीय व्यवहार' बताते हुए कहा कि यदि सरकार सोचती है कि सिर्फ़ संसद में बहस करके बच जाएगी तो उसने विपक्ष को समझने में ग़लती की है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में संसद में 2जी स्पेक्ट्रम पर तीन दिन चर्चा हो चुकी है, अब भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को जेल जाना चाहिए.

वहीं वृंदा करात ने कहा है कि वामपंथी दल संसद की कार्यवाही में बाधा पहुँचाने के ख़िलाफ़ है लेकिन उसके पास और कई विकल्प ही नहीं बचा था.

दोनों नेताओं का कहना था कि उन्होंने ही वर्ष 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का मामला उठाया था और उनके दबाव की वजह से ही इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए गए.

सात सवाल

इसके अलावा भाजपा ने प्रधानमंत्री के संसद में बहस के प्रस्ताप को ठुकराते हुए चुप्पी पर सात सवाल पूछे हैं.

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस के नेता एकाएक मनमोहन सिंह के दबाव में सामने आ गए हैं और इस 'राग-दरबारी' से भ्रष्टाचार का मामला छिप नहीं सकेगा.

उन्होंने प्रधानमंत्री पर "भ्रष्टाचार का षडयंत्र", "निष्क्रियता का अपराधी" और "तटस्थता का दोषी" होने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि इन सात सवालों ने देश को परेशान कर दिया है और अब प्रधानमंत्री को इनका जवाब देना चाहिए.

इसमें भाजपा ने 2जी स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरु होने से लेकर केंद्रीय जाँच आयोग (सीबीआई) की जाँच तक कई आरोप लगाते हुए सवाल पूछे हैं.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "प्रधानमंत्री ने विपक्ष से संसद में बहस करने की अपील की है और कहा है कि वह संसद की कार्यवाही चलने दे, लेकिन विपक्ष ने इस पर बहस की, और बहस की और सवाल पूछे लेकिन अब वे और बहस चाहते हैं, अब समय आ गया है जब दोषी लोगों को जेल जाना होगा."

उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले हफ़्ते प्रणब मुखर्जी ने दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं से कहा था कि जेपीसी के मामले में वे प्रधानमंत्री से चर्चा करने के बाद कुछ बताएँगे लेकिन उन्होंने कभी कुछ नहीं बताया.

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