टेप लीक: टाटा पहुँचे सुप्रीम कोर्ट

Image caption रतन टाटा का कहना है कि वह बातचीत निजी थी

टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके कहा है उनके और जनसंपर्क प्रतिनिधि नीरा राडिया के साथ हुई बातचीत के टेप को सार्वजनिक करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

अपनी याचिका में रतन टाटा ने कहा है कि इस बातचीत के सार्वजनिक होने से जीने के उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है, जिसमें प्राइवेसी या निजता का हनन शामिल है.

इस याचिका में केंद्र सरकार के कई विभागों को पार्टी बनाया गया है.

नीरा राडिया की कंपनी टाटा समूह के लिए जनसंपर्क का काम करती है. बातचीत के जो विवरण कुछ पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं उसमें नीरा राडिया और रतन टाटा के बीच हुई बातचीत भी शामिल है.

केंद्रीय गृह सचिव की अनुमति से नीरा राडिया के टेलीफ़ोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग आयकर विभाग ने की थी क्योंकि उन्हें टैक्स घपले का शक था, वर्ष 2009 में हुई इन रिकॉर्डिंगों के विवरण लगभग दस दिन पहले 'द ओपन' नाम की पत्रिका ने प्रकाशित किए थे और बाद में 'आउटलुक' ने भी इसे प्रकाशित किया है.

इन टेपों के सामने आने के बाद उद्योगपतियों, नेताओं और पत्रकारों के गिरोहबंद होकर काम करने को लेकर बहस तेज़ हो गई है.

याचिका

रतन टाटा ने अपनी याचिका में मुख्य रुप से तीन बातें कहीं हैं.

एक यह कि उनकी निजता की रक्षा की जानी चाहिए, दूसरा यह कि जो भी बातचीत रिकॉर्ड की गई है उसके प्रकाशन पर रोक लगाई जानी चाहिए और तीसरे यह कि अधिकारिक कारणों से अगर बातचीत टेप किए गए थे तो उनका उपयोग जाँच के लिए होना चाहिए और इस तरह से उसे सार्वजनिक करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.

रतन टाटा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी और नीरा राडिया की निजी बातचीत है और वह किसी भी तरह से जाँच का हिस्सा नहीं हो सकतीं.

टाटा ने अपनी याचिका में केंद्रीय गृह सचिव, सीबीआई, आयकर विभाग, दूरसंचार विभाग और सूचना तकनीक विभाग को पार्टी बनाया है.

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