बिहार: सदन के कोने में सिमटा विपक्ष

बिहार विधान सभा
Image caption विधानसभा के भीतर विपक्ष का अस्तित्व लगभग खोया हुआ नज़र आया.

नवगठित 15वीं बिहार विधानसभा के पहले सत्र का पहला दिन सदन के अंदर विपक्ष के लगभग खोए हुए अस्तित्व का अहसास करा रहा था. विपक्षी सदस्यों की इतनी कम संख्या इस सदन में पहले कभी नहीं रही.

कुल 243 सीटों में से मात्र 37 सीटों पर निर्दलीय समेत पांच विरोधी दल सिमटे हुए थे बाक़ी सभी 206 सीटों पर दो सत्ताधारी दल छाए हुए थे. यानी जनता दल (यू) के 115 और भारतीय जनता पार्टी के 91 सदस्यों का भारी-भरकम वर्चस्व राष्ट्रीय जनता दल के 22 और बाक़ी विपक्ष के 15 सदस्यों के मनोबल को मंद बनाए हुए था. सत्ता पक्ष और विरोध पक्ष के बीच का यह भारी असंतुलन विधानसभा परिसर में मंगलवार को चर्चा का विषय बना हुआ था.

सत्ताधारी ख़ेमे के एक विधायक ने सहानुभूति व्यक्त करने के अंदाज़ में जब ये कहा कि लोकतंत्र के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है, तो एक विपक्षी विधायक भड़क गए.

वो कहने लगे, ''इस तरह व्यंग्य मत करिए और जीत के आंकड़ों पर अकड़ भी मत दिखाइए. बड़ा लोकतंत्र वाले हो गए हैं. पता चल जाएगा जब सदन में यही मुट्ठी भर विपक्ष आप के विकास का रंग बिरंगा फुकना ( बलून) फोड़ने लगेगा.'' बिना बात का बतंगड़ बनते देख एक दूसरे विधायक ने चुटकी ली, ''लालटेन वाले भाई जी इसलिए खिसिया रहे हैं क्योंकि 20-25 साल में ये पहला मौक़ा है जब लालू-परिवार का कोई सदस्य सदन में नहीं दिख रहा है.'' राज्य विधानमंडल में लालू-राबड़ी और साधु-सुभाष में से किसी न किसी की उपस्थिति वाले उन बीते दिनों का ज़िक्र आ जाना स्वाभाविक था.

ख़ासकर इसलिए क्योंकि राबड़ी देवी की हार ने लालू-परिवार से बाहर के व्यक्ति लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीक़ी को सदन में प्रतिपक्ष का नेता बनने का अवसर दे दिया. सिद्दीक़ी को यह पद हासिल करने के लिए उनके राष्ट्रीय जनता दल के सदन में कम से कम 25 सदस्य होने चाहिए, जबकि इस दल के केवल 22 सदस्य हैं.

इस बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को दो ख़ास संकेत दिए.

एक ये कि नवगठित विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए गुरुवार को होने वाले चुनाव में फिर से उदय नारायण चौधरी ही चुन लिए जा सकते हैं.

प्रतिपक्ष पर लचीला रुख़

दूसरी बात कि सदन में राजद के नेता सिद्दीक़ी को प्रतिपक्ष का नेता पद मिले, इस मामले में सत्ता पक्ष का और संभवत अध्यक्ष का भी लचीला रुख़ रहेगा. 30 नवंबर से 9 दिसंबर तक सात बैठकों वाले इस पहले सत्र के शुरुआती दो दिन नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए रखे गए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संख्या के भारी अंतर का कोई फ़ायदा उठाने जैसी मनमानी सरकार नहीं करेगी और प्रतिपक्ष का पूरा सम्मान किया जाएगा. इस बीच जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह को बिहार प्रदेश जदयू का अध्यक्ष मनोनीत किया है.

इनसे पहले के पार्टी प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी को मुख्यमंत्री ने अपने कैबिनेट में शामिल करके राज्य का जल संसाधन मंत्री बना दिया है.

चर्चा है कि जदयू के जो सांसद चुनाव के समय कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण नीतीश कुमार की नज़रों पर चढ़ गए थे, उन पर अब अनुशासनिक कार्रवाई हो सकती है.

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