आंध्र में 39 मंत्रियों ने शपथ ली

किरण रेड्डी
Image caption किरण रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने से नाराज़ जगन मोहन रेड्डी पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके हैं.

आंध्र प्रदेश में 39 सदस्यों वाले नए मंत्रिमंडल ने शपथ ग्रहण कर लिया है. मुख्यमंत्री नाल्लारी किरण कुमार रेड्डी ने जिन नए 11 मंत्रियों को शामिल किया है, उनमें सबसे प्रमुख वाईएस विवेकानंद रेड्डी हैं जो कांग्रेस और लोक सभा से त्यागपत्र देने वाले जगन मोहन रेड्डी के चाचा हैं.

मंगलवार को जगन रेड्डी के साथ बहुत ही तीखी बहस और झगड़े के बाद विवेकानंद रेड्डी ने यह घोषणा कर दी थी कि कांग्रेस से निकलने का उनका कोई इरादा नहीं है और वो सोनिया गाँधी के वफ़ादार रहेंगे.

किरण कुमार रेड्डी ने पिछले मंत्रिमंडल के पांच सदस्यों को अपनी टीम में नहीं लिया है.

उनमें से चार जगन मोहन रेड्डी के क़रीबी वफ़ादार थे.

इनमें बी श्रीनिवास रेड्डी, पी रामचंद्र रेड्डी, सिल्प मोहन रेड्डी और पिल्ली सुभाष चंदर बोसे शामिल हैं.

पांचवें मंत्री गड़े वेंकट रेड्डी हैं जिन्हें दूसरे कारणों से नहीं लिया गया.

प्रभावशाली जातियों का बोलबाला

कुल मिलाकर इस मंत्रिमंडल में भी प्रभावशाली जातियों का बोलबाला है.

सबसे ज़्यादा 15 मंत्री रेड्डी जाति के हैं जिसमें स्वयं मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि इस के दो कारण हैं.

एक तो आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पर हमेशा रेड्डी जाति का नियंत्रण रहा है और दूसरा कि कांग्रेस नेतृत्व जगन मोहन रेड्डी की चुनौती का सामना करने के लिए भी इस जाति को अपने साथ रखना चाहता है.

इसी उद्देश्य से जगनमोहन रेड्डी के गृह ज़िले कडप्पा से तीन मंत्रियों को लिया गया है जिनमें से दो विवेकानंद के और एक, डीएल रविन्द्र रेड्डी, जगन मोहन रेड्डी के विरोधी है.

एक मात्र मुस्लिम मंत्री सैयद अहमदुल्लाह भी कडप्पा के ही हैं और वो पहले जगन के साथ थे लेकिन बाद में वो उनसे दूर हो गए.

जहाँ तक कमज़ोर जातियों का सवाल है, मंत्रिमंडल में पिछड़ी जातियों के दस, अनुसूचित जातियों के छह, अनुसूचित जनजातियों के दो और एक मुसलमान मंत्री शामिल हैं.

जिन 11 नए मंत्रियों को लिया गया है उनमें भूतपूर्व गृह मंत्री के जना रेड्डी, डॉक्टर शंकर राव, इ प्रताप रेड्डी, बसवराज सारय्या, कासु कृष्ण रेड्डी, महीधर रेड्डी, टीजी वेंकटेश, शैलजा नाथ, थोटा नरसिम्हम शामिल हैं.

अगर प्रांतों की बात की जाए तो सब से ज़्यादा 16 मंत्री तेलंगाना के 15 तटीय आंध्र के और 8 रायल सीमा के हैं.

प्रमुख मंत्री

जिन पुराने मंत्रियों को मंत्रिमंडल में रखा गया है उनमें इन्द्रा रेड्डी, डीके अरुणा, सुनीता रेड्डी, गीता रेड्डी शामिल हैं जो सभी महिलाएँ हैं.

इसके अलावा धर्मना प्रसाद राव, एस विजयारम्मा राजू, बी सत्यनरायाना, पी बालारजू, पी विस्वरूप, वट्टी वसंताकुमार, के पार्थसार्थी, कन्ना लक्ष्मी नारायणा, एमवी राव, रामनारायण रेड्डी, गल्ला अरुणा कुमारी, एनआर वीरा रेड्डी, जी कृष्ण, पोंनाला लक्षमैय्या, डी श्रीधर बाबू, आर वेंकट रेड्डी, के वेंकट रेड्डी, दानं नगेंदर, मुकेश गौड़, सुदर्शन, दामोदर आर नरसिम्हा शामिल हैं.

जिन लोगों को मंत्रिमंडल में नहीं लिए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है उनमें अनंतपुर के शक्तिशाली नेता जेसी दिवाकर रेड्डी और हैदराबाद के एम शशिधर रेड्डी शामिल हैं.

नाराज़गी

आदिलाबाद एक मात्र ज़िला है जहाँ से किसी मंत्री को मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया है.

मंत्री बनने के इच्छुकों की सूची बहुत लंबी थी और इनमें से कई को शामिल नहीं किया गया इसलिए नए मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को नाराज़ गतिविधियों का सामना करना पड सकता है.

जैसे ही यह स्पष्ट हो गया कि रंग रेड्डी ज़िले से केवल एक मंत्री, साबित इंद्र रेड्डी को लिया जा रहा है, पार्टी के सात विधायकों की एक गुप्त बैठक हुई जिसमें उन्होंने आगे की रणनीति पर विचार किया.

एक ऐसे समय जबकि जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस के विधायकों को अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयासों में लगे हैं, इस तरह की नाराज़गी कांग्रेस के लिए समस्याएँ पैदा कर सकती है.

अभी यह देखना बाकी है कि कांग्रेस नेतृत्व आंध्र प्रदेश विधान सभा का अध्यक्ष किसको बनाती है.

अबतक जिन लोगों के नाम लिए जा रहे थे उन में से सभी को मंत्रिमंडल में ले लिया गया है.

अब दो और नामों, एम शशिधर रेड्डी और उत्तम कुमार रेड्डी का उल्लेख हो रहा है.

यह भी देखना दिलचस्प होगा कि तेलंगाना के दलित मंत्रियों में से किसे उप मुख्यमंत्री का पद दिया जाता है.

इनमें दामोदर आर नरसिम्हा और गीता रेड्डी का नाम लिया जा रहा है.

दोनों ही मेदक ज़िले से संबंध रखते हैं.

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