भोपाल गैस कांड, यूनियन कार्बाइड को नोटिस

1984 में हुए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों के लिए मुआवज़े की राशी को 750 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 7,700 करोड़ करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी.

सोमवार को इस याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड, डाओ कैमिकल्स और कुछ अन्य कंपनियों को नोटिस जारी किया.

मुख्य न्यायधीश एसएस कपाड़िया की अध्यक्षता वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने यह भी कहा कि अभियुक्तों पर गैर इरादतन हत्या के कठोर आरोपों को बहाल करने और मुआवज़े की राशी बढ़ाने को लेकर वह 13 अप्रैल से दैनिक आधार पर सुनवाई करेगी.

सीबीआई ने अपनी अपील में यूनियन कार्बाइड के वॉरेन एंडरसन और दूसरे लोगों के खिलाफ़ गैर इरादतन हत्या के गंभीर मामले फिर से शुरु करने का आग्रह किया है.

पुनर्विचार की याचिका

सीबीआई ने अभियुक्तों के खिलाफ़ दुनिया की सबसे खतरनाक औद्योगिक दुर्घटना के लिए गैर-इरादतन हत्या के आरोपों को बहाल करने की मांग की है. इसके लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है.

खंडपीठ ने मुआवज़े की रकम बढ़ाने को लेकर केंद्र की अपील पर ‘मैक्लॉएड रसैल इंडिया’ को भी नोटिस जारी किया है.

इस कंपनी को फिलहास ‘एवररेड्डी इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड’ के नाम से जाना जाता है और इसकी हिस्सेदारी यूनियन कार्बाइड इंडिया में 50.9 फीसदी है.

हालांकि उच्च न्यायालय ने कहा कि वो पहले फौजदारी मामले में सीबीआई की ओर से दायर पुनर्विचार की याचिका पर सुनवाई करेगी.

इस अपील के तहत सीबीआई ने अभियुक्तों के खिलाफ़ दुनिया की सबसे खतरनाक औद्योगिक दुर्घटना के लिए गैर-इरादतन हत्या के आरोपों को बहाल करने की मांग की है. इसके लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है.

उबरा नहीं है भोपाल

ग़ौरतलब है कि अदालत ने 1984 में हुए भोपाल गैस त्रासदी मामले में एंडरसन और दूसरों लोगों के खिलाफ़ लगे आरोपों को कम कर दिया था.

तीन दिसंबर, 1984 को आधी रात के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली ज़हरीली गैस ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थीं.

1984 में हुए इस हादसे से भोपाल अब भी उबर नहीं पाया है.

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