'घोटाले की जाँच विशेष अदालत करे'

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जाँच के लिए विशेष न्यायालय गठित करने के बारे में विचार करे.

अदालत ने साथ ही कहा है कि दूरसंचार घोटाले के सिलसिले में एनडीए कार्यकाल में लिए गए फ़ैसलों की भी जाँच की जानी चाहिए.

अदालत ने साथ ही सीबीआई जाँच की निगरानी करने के बारे में दायर एक याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया है.

खंडपीठ ने इस बारे में एक ग़ैर सरकारी संगठन की याचिका पर लंबी सुनवाई को ख़त्म कर लिया है.

सीबीआई के वकील ने एक बार फिर अदालत में कहा है कि घोटाले की जाँच फ़रवरी तक पूरी कर ली जाएगी लेकिन विदेशों में इसके तार होने की जाँच के लिए और समय की आवश्यकता होगी.

विशेष अदालत और दायरा

अदालत ने 1.76 लाख करोड़ रूपए के स्पेक्ट्रम घोटाले की सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा कि बड़े वित्तीय घोटालों की जाँच विशेष अदालतों से करवाई जानी चाहिए.

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष अदालत के नहीं होने से भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम जैसे क़ानूनों का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा.

दो सदस्यीय पीठ साथ ही कहा है कि घोटाले की सीबीआई जाँच के कार्यक्षेत्र को और विस्तृत करते हुए एनडीए सरकार के कार्यकाल में लिए गए फ़ैसलों की भी जाँच की जानी चाहिए.

न्यायाधीश सिंघवी और न्यायाधीश गांगुली की पीठ ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में उठाए गए मुद्दे केवल पूर्व दूरसंचार मंत्री के कार्यकाल में ग़ायब हो गए 1.76 लाख करोड़ रूपए तक ही सीमित नहीं है बल्कि इनका दायरा कहीं बड़ा है.

अदालत ने कहा कि 2001 में स्पेक्ट्रम वितरण के लिए लागू की गई पहले आओ-पहले पाओ की नीति के बारे में भी ध्यान दिया जाना चाहिए.

सुनवाई

सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील के के वेणुगोपाल ने खंडपीठ को घोटाले की जाँच में प्रगति की जानकारी दी और बताया कि दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरू में ए राजा के घरों पर छापे मारे गए हैं.

अदालत ने इस बारे में सीबीआई को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सीबीआई अदालत से चाहती है कि वह जाँच की ख़बरों को सार्वजनिक ना होने दे लेकिन सीबीआई के छापे की ख़बर हर जगह चल रही है.

अदालत ने कहा,"आप चाहते हैं कि गोपनीयता बनाए रखी जाए मगर हरेक टीवी चैनल पर आपके छापे दिखाए जा रहे हैं.”

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ग़ैर सरकारी संगठन के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई के शिकायत मिलने के एक साल बाद छापे मारने का कोई औचित्य नहीं है.

अदालत ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि देर से कुछ होना, कुछ ना होने से बेहतर है.

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