तेलंगाना आंदोलन के मामले वापस

तेलंगाना
Image caption तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर राज्य में कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं

आंध्र प्रदेश सरकार ने तेलंगाना राज्य की मांग और विरोध कर रहे लगभग ढ़ाई हज़ार लोगों के विरुद्ध मुक़दमा वापस ले लिया है.

लेकिन राज्य सरकार ने हिंसा, तोड़फोड़ और निजी संपत्ति पर हमले जैसे गंभीर मामले वापस नहीं लिए हैं. आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री सबिता इंद्र रेड्डी ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार ने 565 मामले वापस लेने का फ़ैसला लिया है.

पिछले साल दिसंबर से इस वर्ष सितंबर तक 8047 लोगों के ख़िलाफ़ 1667 मामले दर्ज किए गए थे.

सरकार ने यह घोषणा एक ऐसे समय पर की है जब कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस)और कई दूसरे दल और संगठन लगातार सरकार पर दबाव डाल रहे थे कि वह छात्रों के विरुद्ध दर्ज किए गए मामले वापस ले लें.

टीआरएस ने पिछले दो दिनों से इस मामले पर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की हुई थी. सोमवार के फ़ैसले से टीआरएस और दूसरे दल संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने तमाम मामलों को वापस लेने की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही को फिर बाधित किया जिसके कारण विधानसभा को दो बार स्थगित करनी पड़ी.

मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह मामले वापस ले रही है.

इसमें तेलंगाना,आंध्र और रायलसीमा के सभी क्षेत्रों के लोग भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा,"संयुक्त आंध्र और तेलंगाना राज्य की समस्या अभी पूरी तरह हल नहीं हुई है और किसी समस्या का हल निकालने से पहले उससे जुड़े मामले वापस लेना एक अभूतपूर्व बात है.लेकिन छात्रों और राजनीतिक दलों की मांग को देखते हुए यह फैसला किया गया है."

उन्होंने कहा कि अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस साल 31 दिसंबर को श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट आने के बाद हालात कैसे रहेंगे.

सलाह

उन्होंने छात्रों से किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने को कहा है.सरकार बाक़ी मामलों की भी समीक्षा करेगी. लेकिन टीआरएस ने उनके इस वक्तव्य का विरोध किया और मांग की है कि तमाम मामलों को वापस लिया जाए.

टी हरीश राव ने कहा की सरकार तेलंगाना आंदोलन को दबाने के लिए इस तरह की बात कर रही है.

तेलुगु देशम और कांग्रेस के तेलंगाना समर्थक नेताओं ने भी तमाम मामले वापस लेने की मांग की.

जहाँ मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अकबरुद्दीन ओवैसी और प्रजा राज्यम पार्टी के कन्ना बाबू ने कहा कि लोग यह सोच कर परेशान हैं कि 31 दिसंबर के बाद क्या होगा, वहीं बीजेपी के किशन रेड्डी ने कहा कि कोई गड़बड़ नहीं होगी और कुछ लोग बिना कारण लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं.

ओवैसी ने ये भी मांग की कि सरकार सब के साथ समान व्यवहार करे और संप्रदायिक दंगों के दौरान मुस्लिम युवाओं के विरुद्ध जो मामले दर्ज किए गए उन्हें वापस ले ले.

गृह मंत्री ने उन्हें विश्वास दिलाया की सरकार इस मामले पर अलग से जवाब देगी.

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