टैपिंग ज़रूरी, पर सावधानी आवश्यक: प्रधानमंत्री

मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि फ़ोन टैपिंग ज़रूरी है लेकिन इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री का कहना था, ''यदि फ़ोन टैपिंग आधिकारिक कारणों से करनी भी पड़ जाए तो ये ध्यान रखा जाए कि वो नियमों के अंतर्गत हो.''

उनका कहना था कि सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के अलावा कोई और फ़ोन टैपिंग न करा सके, इसके लिए टेक्नॉलोजी को और दुरुस्त किए जाने की ज़रूरत है.

कोर्पोरेट सप्ताह का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा उन्हें इस बात की जानकारी है कि फ़ोन टैपिंग को लेकर औघोगिक जगत उद्वेलित हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर से फ़ोन टैपिंग मामले को देखने और एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेने को कहा गया है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वो उस शिकायत की प्रति अदालत में जमा करें जिसके आधार पर कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की बातचीत टेप करना शुरु किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों जीएस सिंघवी और एके गांगुली के एक पीठ ने कहा, "अटॉर्नी जनरल इस शिकायत की प्रति एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में अदालत में जमा करवाएँ."

नीरा राडिया की बातचीत के जो हिस्से लीक हुए हैं और मीडिया में प्रकाशित हुए हैं उसमें राजनीतिज्ञों, उद्योग व्यवसाय की कई प्रमुख हस्तियों और पत्रकारों से उनकी बातचीत शामिल है.

प्रकाशित विवरणों में से एक नीरा राडिया और टाटा उद्योग समूह के प्रमुख रतन टाटा के बीच हुई बातचीत भी है.

रतन टाटा ने इसके ख़िलाफ़ याचिका दायर करके कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि इससे उनकी निजता यानी प्राइवेसी का हनन होता है.

इस याचिका का जवाब देते हुए पिछले हफ़्ते सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि नीरा राडिया के ख़िलाफ़ वर्ष 2007 में ये शिकायत मिली थी कि उन्होंने नौ साल के अल्पकाल में 300 करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर ली.

सरकार ने कहा था कि उन पर विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी की एजेंट होने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी शक था.

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