शिक्षक ने शिक्षक को गोली मारी

राजस्थान, स्कूल (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption स्कूल के कुछ ऐसे ही बच्चों के सामने हुई घटना का उनके मन पर गहरा असर पड़ सकता है.

राजस्थान के करौली ज़िले के एक निजी स्कूल में एक शिक्षक ने अपने ही साथी की गोली मार कर हत्या कर दी और फिर ख़ुद को भी गोली मारकर ख़त्म करने का प्रयास किया.

लेकिन उसे बचा लिया गया और गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस इस घटना के कारणों का पता लगा रही है.

करौली ज़िले के पत्तोंदा गाँव के महावीर दिगंबर जैन उच्च प्राथमिक स्कूल में उस समय बच्चे हतप्रभ और ख़ौफ़ज़दा हो गए जब एक शिक्षक प्रदीप कुमार ने अपनी साथी शिक्षक छगनलाल शर्मा को ललकारा और गोली मार दी.

इसके बाद प्रदीप ने ख़ुद को एक कमरे में बंद किया और फिर ख़ुद पर भी गोली चला दी.

उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

हादसे से पहले छगन लाल अपनी कुर्सी पर बैठे सातवीं कक्षा के बच्चों की हाज़िरी ले रहे थे.

उन्हें तनिक भी अंदाज़ा नहीं था कि कैसे मौत उनका इंतज़ार कर रही है.

चश्मदीद लोगों ने पुलिस को बताया कि उस समय स्कूल में बच्चों के पढ़ने की ध्वनि सुनाई दे रही थी.

फिर सहसा धमाके की आवाज़ सुनाई दी और शिक्षक छगनलाल वही ढ़ेर हो गए.

मामला

करौली के उप पुलिस अधीक्षक मन्नू लाल मीना ने बीबीसी को बताया, ''प्रदीप के पास से कुछ पत्र लिखे मिले हैं और ये पत्र पुलिस और ज़िला अधिकारी को संबोधित है, जिसमें उसने छगनलाल की शिकायत की है.लगता है उसने पहले ही छगन की हत्या करने का मंसूबा बना लिया था. इसलिए प्रदीप ने अपने बीबी-बच्चों को उत्तर प्रदेश गाँव छीबरमाहू, कन्नौज भेज दिया था.''

पुलिस के मुताबिक इस शिक्षक को अपने साथी की हत्या पर कोई ग्लानि नहीं थी.

लेकिन प्रदीप के पत्रों से पता चलता है कि दोनों के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत दुश्मनी चल रही थी.

पुलिस के मुताबिक,प्रदीप ने अपने ख़त में ये भी लिखा है कि उसकी मौत के बाद उसकी आँखें दान कर दी जाएँ.

स्कूल में कोई ढ़ाई सौ बच्चे पढ़ने आते हैं और रोज़ अपने शिक्षकों से ज्ञान का पाठ पढ़ कर लौटते थे.

इसमें अमन और भाईचारे का पहलू भी शामिल होता है.मगर अब ना जाने बच्चों के बाल मन पर ये घटना क्या प्रभाव छोड़ेगी.

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