स्वदेश लौटने की इजाज़त है पर पैसे नहीं

Image caption मार्क उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भारत आए थे

ऊँची शिक्षा के लिए कोई पंद्रह साल पहले अफ़्रीका के युगांडा से भारत आने वाले और फ़ौजदारी मामले में फंसे मार्क को अब अपने मुल्क़ जाने की अनुमति मिल गई है.

जयपुर की एक स्थानीय अदालत में मार्क ने ये कह कर गुहार लगाई थी कि या तो उसे युगांडा जाने दिया जाए या फिर उसे जेल में डाल दिया जाए ताकि उसे रोटी मिल सके.

अदालत ने उसे अपने देश लौटने की इजाज़त दे दी है.मगर मार्क के लिए राह उतनी आसान नहीं है. उसे वापसी के लिए धन भी जुटाना होगा.

कोर्ट कचहरी और लंबी कानूनी जंग के बाद मार्क के लिए ये ख़ुशी के क्षण थे.पर ऐसे खुशगवार पलों के लिए मार्क को कोई एक दशक से भी ज़्यादा का इंतज़ार करना पड़ा.

वो वर्ष 1996 में भारत आए और जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय में दाख़िला ले लिया.

इसके बाद विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों और मार्क के ख़िलाफ़ परीक्षा में ग़लत तरीके अपनाने का मुक़दमा दर्ज हुआ.मगर पुलिस इतने सालों में उसके ख़िलाफ़ कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाई.

इसके बावजूद भी मार्क को अपने वतन लौटने की अनुमति नहीं मिली. उसके वकील सुधीर ने बीबीसी को बताया कि अदालत ने उसकी दया याचना सुनने के बाद युगांडा जाने की इजाज़त दे दी है.

मार्क खुद को बेगुनाह बताते हैं.पिछले एक दशक से जयपुर की सड़कें,फुटपाथ और आवारा कोने उनकी पनाहगाह रहे हैं.

वो फुटपाथ पर घड़ी बेच कर अपने लिए रोटी का बंदोबस्त करते रहे.फिर कभी रात को पुलिस भी उसे परेशान करती और कभी अंजान लोग उसके भारत में होने की वजह पूछते .

ये जो देश है मेरा

आपबीती सुनाते- सुनाते मार्क का गला भर आता है. वे कहते हैं,"मैंने पंद्रह साल से अपने भाई बहन नहीं देखे, मेरी माँ अपने बेटे की सूरत देखने का सपना लिए इस दुनिया से चल बसी.मुझ पर रहम किया जाए और मुझे मेरे देश लौटने दिया जाए."

उनके वकील सुधीर को लगता है कि मार्क एक ग़रीब मुल्क़ से है, इसलिए उनकी सुनवाई में इतना लंबा वक्त लगा.

पर अभी मार्क को भारत से युगांडा जाने के लिए पैसे का इंतज़ाम करना होगा. कोर्ट के फ़ैसले से पहले वो खुश हुए और फिर जब मैली कुचली जेब में हाथ डाला तो उदास हो गए.

ये भारत है ,वो युगांडा का बाशिंदा है. भाषा और भूगोल अलग-अलग हो सकते हैं. मगर स्वदेश का भाव तो हर धरती पर एक जैसा होता है.

इसलिए लौटता हुआ मार्क भी ''ये जो देश है मेरा.. स्वदेश है मेरा..." जैसे गाने गुनगुना रहा है.

संबंधित समाचार