आंध्र में कांग्रेस की स्थिति ख़राब

जगन
Image caption जगन मोहन रेड्डी भी अब भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार की स्थिरता खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है. कांग्रेस के बागी नेता जगन मोहन रेड्डी की 48 घंटे की भूख हड़ताल में लगभग 20 कांग्रेसी विधायकों ने हिस्सा लिया जबकि प्रजा राज्यम पार्टी के भी दो विधायकों ने जगन को समर्थन की घोषणा की है.

इसके अलावा तेलुगु देसम के एक विधायक ने भी जगन के साथ जाने की बात कही है.

अगर राज्य विधान सभा में अनेक दलों की स्थिति देखी जाए तो स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार एक तरह से अल्पमत में आ सकती है.

294 सदस्यों के सदन में कांग्रेस के कुल 156 सदस्य हैं. इनमें से बीस खुल कर जगन के साथ खड़े हो गए हैं. इस का अर्थ यह है कि कांग्रेस के पास अब केवल 136 विधायक हैं जो आवश्यक संख्या से 11 कम है.

कांग्रेस अब तक उम्मीद कर रही थी की अगर ज़रुरत पड़ी तो वोह अभिनेता चिरंजीवी की प्रजा राज्यम के सोलह विधायकों का समर्थन लेगी लेकिन इनमें से दो भी जगन के साथ खड़े हैं.

Image caption चंद्रबाबू नायडू आमरण अनशन पर हैं और सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं.

हालांकि कांग्रेस बागी विधायकों के ख़िलाफ़ दल बदल विरोधी कानून के तहत करवाई कर सकती है और उन्हें अयोग्य घोषित कर सकती है. बाघी विधायक इस करवाई से उसी समय बच सकते हैं जब कांग्रेस के एक तिहाई विधायक यानि कम से कम 52 विधायक पार्टी छोड़ दें.

जगन के समर्थक दावा कर रहे हैं की उन्हें पचास से ज्यादा विधायकों का समर्थन प्राप्त है जो सही समय पर खुल कर सामने आएंगे.

अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस सरकार गिर सकती है और राज्य में मध्यवाधि चुनाव की नौबत आ सकती है.

राज्य में एक ऐसे समय राजनीतक समीकरण बदलते नज़र आ रहे हैं जब तेलुगु देसम ने धमकी दे रखी है कि वो कांग्रेस सरकार के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव ला सकती है. दूसरी तरफ तेलंगाना क्षेत्र में भी हालत बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं क्योंकि तेलंगाना राष्ट्र समिति ने धमकी दे रखी है कि अगर केंद्र ने 31 दिसम्बर के बाद तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए कदम नहीं उठाए तो वो आन्दोलन तेज़ कर देगी.

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