डॉक्टर हनीफ़ को हर्जाना देगी ऑस्ट्रेलियाई सरकार

डॉक्टर हनीफ़

भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को आतंकवादियों से ग़लत तरीके से जोड़ने के मामले में ऑस्ट्रेलिया सरकार मुआवज़ा देने पर सहमत हो गई है.

डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को जुलाई, 2007 में ब्रिटेन के शहर ग्लासगो में चरमपंथी हमलों से जुड़े लोगों की मदद करने के आरोप में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन एअरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया गया था.

उस वक्त वो ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड कोस्ट के एक अस्पताल में रजिस्ट्रार के तौर पर काम कर रहे थे.

डॉ हनीफ़ को कई दिनों तक हिरासत में रखा गया और फिर उन पर चरमपंथियों को मदद करने का आरोप लगाया गया था.

लेकिन बाद में उनके ख़िलाफ़ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से ख़ारिज कर दिए गए थे और उन्हें बाइज्ज़त बरी कर दिया गया था.

लगभग दो हफ़्तों तक हिरासत में रहने के बाद जब डॉ मोहम्मद हनीफ़ को ज़मानत मिली लेकिन कुछ ही घंटों बाद ऑस्ट्रेलिया के अप्रवासन मंत्री ने उनका ऑस्ट्रेलियाई वीज़ा रद्द कर दिया था और भारत वापस आना पड़ा था.

हनीफ़ ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और उनका वीज़ा उन्हें वापिस मिल गया था.

पुलिस की किरकिरी

इस मामले पर ऑस्ट्रेलिया की पुलिस की ख़ासी किरकिरी हुई थी और उन्हें डॉक्टर हनीफ़ पर लगे आतंकवाद के आरोपों को वापस लेना पड़ा था.

ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने अपनी ग़लती के लिए उनसे माफ़ी भी माँगी थी और कहा था कि उनके ख़िलाफ़ आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए था.

इस पूरे मामले पर एक जांच कमेटी भी बिठाई गई थी जिसका निष्कर्ष यही था कि डॉ हनीफ़ ने ऐसा कुछ नहीं किया था कि सरकार और ऑस्ट्रलियाई पुलिस उनके साथ इस तरह का व्यवहार करती.

बाद में डॉक्टर हनीफ़ ने इस मामले को अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार उन्हें मुआवज़ा देने पर सहमत हो गई है.

डॉक्टर हनीफ़ के वकील रॉड हॉगसन ने ये बताने से तो इनकार कर दिया कि मुआवज़े की राशि क्या है, उन्होंने बस इतना कहा कि ये 'अच्छी खासी' है.

बाद में ऑस्ट्रेलिया में पत्रकारों से बातचीत में डॉक्टर हनीफ़ ने कहा कि इस मुआवज़े से उन्हें और उनके परिवार को जो भयावह अनुभव झेलने पड़े थे, उससे उबरने में थोड़ी मदद मिलेगी.

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