बिनायक के समर्थन में अभियान

बिनायक सेन

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बिनायक सेन को इंसाफ दिलाने के लिए एक व्यापक आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर ली है.

ये मुहिम इंटरनेट पर भी ख़ासी ज़ोर पकड़ रही है. एक वेबसाइट पर हज़ारों लोगों ने दस्तख़त कर राष्ट्रपति से डॉ. बिनायक सेन की रिहाई और उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को वापस लेने की मांग की है.

इस वेबसाइट पर दुनिया भर के लोगों के हस्ताक्षर करने का सिलसिला जारी है. फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर भी ये मुहिम तेज़ी से चल रही है.

यहाँ तक कि मोबाइल पर भी ये समर्थन याचिका उप्लब्ध कराई जा रही है.

मुद्दा

सामाजिक कार्यकर्ता औऱ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य अरुणा रॉय ने बिनायक सेन के ख़िलाफ कोर्ट के फ़ैसले को ग़ैर क़ानूनी निर्णय बताया और कहा कि वे इस मुद्दे को सलाहकार परिषद के सामने भी उठाएँगी.

उन्होंने कहा, "समाज को ये समझना पड़ेगा कि ये मुद्दा अब सबका मुद्दा बन गया है. राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का निर्णय क्या होगा, वो मैं नहीं बता सकती, लेकिन हम ये मुद्दा परिषद में ज़रूर उठाएँगें." शनिवार को मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी डॉ बिनायक सेन की रिहाई की मांग की थी और कहा था कि जिस क़ानून के तहत बिनायक सेन को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है, वो अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष न्याय के मानकों का उल्लंघन करती है.

संस्था के एशिया-प्रशांत के निदेशक सैम ज़रीफ़ी ने इस फ़ैसले को राजनीति से प्रेरित बताया था. अरुणा रॉय ने भी दबे शब्दों में राजनीति को ही दोषी ठहराया लेकिन कोई नाम नहीं लिया.

अरुणा रॉय कहती हैं, "इसके पीछे एक राजनीतिक दल हैं या दो राजनीतिक दल हैं या फिर पूरी सत्ता है, इसके ऊपर तो प्रश्नचिन्ह है. लेकिन उनकी भागीदारी भी इसमें हैं."

तर्क

लेकिन आंतरिक सुरक्षा मामलों के जानकार और सीमा सुरक्षा बल मे महानिदेशक रह चुके प्रकाश सिंह का कहना है कि न्याय प्रणाली पर इस तरह से सवाल उठाया जाना ग़लत है.

प्रकाश सिंह ने कहा, "सेशन कोर्ट के न्यायधीश कोई पागल तो नहीं था. उन्होंने अगर ऐसा फ़ैसला दिया है, तो सबूतों के आधार पर ही दिया होगा."

उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के अच्छे काम को उसके ग़ैर क़ानूनी काम से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए.

प्रकाश सिंह ने कहा, "दुर्भाग्य से हम दो अलग-अलग मुद्दों को मिला रहे हैं. बिनायक सेन की सज्जनता और उनके मानवीय कार्य में कोई विवाद नहीं है. लेकिन कहीं न कहीं उन्होंने क़ानून की लक्ष्मण रेखा को पार किया."

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो इस मामले में ख़ुद संज्ञान लेते हुए जाँच करे. उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बैनर्जी ने भी उनका समर्थन किया है.

तो वहीं सोमवार को दिल्ली में अरुंधति रॉय और स्वामी अग्निवेश समेत विद्यार्थी, मीडिया से जुड़ी संगठनें और पीयूसीएल बिनायक को दी गई कारावास के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करगें.

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