आंदोलन छोड़ने को तैयार नहीं गूजर

गूजर आंदोलनकारी
Image caption पिछले छह दिनों से आरक्षण की मांग को लेकर गूजर आंदोलनरत हैं

राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गूजर नेता और सरकार के बीच रविवार को बातचीत हुई, लेकिन गूजर नेता आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं है.

सरकार की और से ऊर्जा मंत्री जितेंदर सिंह गूजरों की मांग पर भरतपुर ज़िले में उस स्थान पर गए, जहाँ गूजर रेल पटरियों पर धरना दिए बैठे है.

ग़ौरतलब है कि गूजर प्रदर्शनकारियों ने मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग अवरुद्ध कर रखा है. पिछले छह दिनों से अपनी बिरादरी के लिए आरक्षण की मांग को लेकर वे ज़ोरदार आंदोलन कर रहे है.

ऊर्जा मंत्री स्वयं गूजर समुदाय से है. उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि सरकार उनकी मांगो को लेकर गंभीर है.

उपाय

हालांकि उन्होंने ये भी कहा सरकार को थोडा समय दे, ताकि पुख्ता क़ानूनी उपाय किए जा सके.

लेकिन गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा, "हमारी बिरादरी के लोग तब तक नहीं उठेंगे जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएँगी."

गूजर नेताओं और सरकार के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी. अभी ये स्पष्ट नहीं है कि दूसरे दौर की बातचीत कब होगी.

इससे पहले शनिवार को राजस्थान सरकार ने तीन अधिकारियों नगर विकास आयुक्त जीएस संधू, शिक्षा सचिव अशोक संपतराम और निरंजन आर्य को गूजर नेताओं से बातचीत के लिए भेजा था.

गूजर नेताओं ने उन्हें बातचीत के लिए दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर आमंत्रित किया था लेकिन अधिकारियों का कहना था कि बातचीत पटरी पर नहीं हो सकती.

रेल मार्ग जाम

इस बीच राज्य में जगह-जगह गूजर सड़क और रेल मार्ग जाम कए बैठे हैं और इसका दायरा बढ़ता जा रहा है.

आंदोलनकारियों ने जयुपर-दिल्ली रेल मार्ग जाम कर दिया और कई रेलगाड़ियाँ रद्द करनी पड़ी है.

रेलवे के मुताबिक़, 50 से ज्यादा रेलगाड़ियों का मार्ग बदल कर चलाया जा रहा है.

राज्य रोडवेज ने अपनी दो सौ से ज़्यादा बसें स्थगित की है. ये बसें उन मार्गो पर नहीं जा पा रही है जहाँ गूजर आंदोलन कर रहे हैं.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गूजर नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है. हालांकि इस अपील का ज़्यादा असर नहीं हुआ.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी नेता नितिन गडकरी और वसुंधरा राजे पर सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि वे गूजरों के आंदोलन को भड़का रहे हैं.

गहलोत ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे भाजपा के लोग हैं और वो राज्य में अराजकता पैदा करना चाहते है. लेकिन सरकार उनके मंसूबे पूरे नहीं होने देगी.

उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने गहलोत के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उनकी पार्टी का इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है.

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