गूजरों से बातचीत की कोशिश विफल

पटरी पर बैठे गूजर आंदोलनकारी

राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गूजरों से शनिवार को बातचीत की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई.

राजस्थान सरकार ने तीन अधिकारियों नगरीय विकास आयुक्त जीएस संधू, शिक्षा सचिव अशोक संपतराम और निरंजन आर्य को गूजर नेताओं से बातचीत के लिए भेजा था.

गूजर नेताओं ने उन्हें बातचीत के लिए दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया था लेकिन अधिकारियों का कहना था कि बातचीत पटरी पर नहीं हो सकती.

राजस्थान सरकार का कहना है कि रविवार को बातचीत की दोबारा कोशिश की जाएगी.

शनिवार को गूजर आंदोलन का कोई हल निकालने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक हुई.

इसमें आंदोलन और इसको हल करने की कोशिशों की समीक्षा की गई.

भाजपा पर आरोप

इधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने भारतीय जनता पार्टी नेता नितिन गडकरी और वसुंधरा राजे पर सीधे सीधे आरोप लगाया है कि वे गूजरों के आंदोलन को भड़काने में उनका आरोप है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गूजर नेताओं से रेल मार्गों को छोड़ कर बातचीत की टेबल पर आने का आग्रह किया है लेकिन आंदोलनकारी टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हैं.

पिछले पांच दिनों से भरतपुर ज़िले के पिलुकापुरा में दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर डेरा डाले बैठे गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जातीं हम रेल पटरियों से नहीं हटेगें. मेरी राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात हुई है, देखते हैं आगे क्या होता है.'

उल्लेखनीय है कि गूजरों ने रेल और सड़क मार्गों को अवरुद्ध किया हुआ है.

आंदोलन जारी

गूजरों का आंदोलन छह दिन पूरे हो चुके हैं और उनके तेवर अब भी तीखे बने हुए हैं.

इन आंदोलनकारियों के रेल पटरियों की घेरेबंदी करने से रेल यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. गूजरों के पटरियों पर आ जाने से भीलवाड़ा और अजमेर के बीच गाड़ियों का आवगमन रुक गया है.

इन आंदोलनकारियों ने दिल्ली -मुंबई मार्ग पहले से ही रोक रखा है. अब तक 70 ट्रेनों का रास्ता बदला गया है और 50 ट्रेने आंशिक रूप से या पूरी तरह रद्द की गईं हैं.

गूजर सरकार से पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

सरकार से नाराज़ गूजर समुदाय जगह-जगह पर पंचायत कर रहा है और पंचायत में फ़ैसले लेने के बाद वे जगह-जगह सड़कों पर भी यातायात अवरुद्ध कर रहे हैं.

कांग्रेस सरकार किसी भी सूरत में टकराव टालना चाहती है ताकि कहीं हिंसा की नौबत न आए.

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